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700 की जगह 32 हजार के बिल

Tue, 24 Feb 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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केस हिस्ट्री -1
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शहर के मोहल्ला आनंदनगर निवासी बुद्धीलाल के घर में तीस साल पुराना विद्युत कनेक्शन है। अभी तक सात या आठ सौ के  बीच में बिल आता रहा। 40 दिन पहले विभाग ने उनके घर पर मैकेनिकल मीटर हटाकर इलेक्ट्रानिक मीटर लगा दिया। जनवरी का बिल आया तो पेशे से राजमिस्त्री बुद्धीलाल के पैरों तलेे जमीन खिसक गई

बिल में देय राशि 32,431 रुपये दर्शाई गई थी। बुद्धीलाल का कहना है कि  उनके घर में टीवी और बल्बों का उपयोग होता है। गर्मी में कूलर चला लेते हैं। इतना बिल कैसे आ गया, पता नहीं। बुद्धीलाल मजदूरी छोड़कर पिछले कई दिनों से बिजली दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। परिवार की मासिक आय दस हजार से कम है।
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केस हिस्ट्री -2
कांशीराम कालोनी राहतपुरा निवासी संजीव कु मार पुत्र नवाब सिंह जाटव दिहाड़ी मजदूर हैं। मासिक आय पांच हजार से भी कम है। बड़ी मुश्किल से गुजारा चलता है। बीपीएल कार्ड होने के कारण ही उन्हें कांशीराम कालोनी में आशियाना मिला था। संजीव के  कनेक्शन पर जनवरी माह का 20,324 रुपये का बिल आया है।

संजीव का कहना है कि उनके घर में पंखा और बल्ब के अलावा कोई उपकरण नहीं है। कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। विभाग के चक्कर लगाने में उनकी रोजीरोटी प्रभावित है। संजीव का कहना है कई लोग मुफ्त में बिजली जला रहे है विभाग उनका कुछ नहीं कर पा रहा। संजीव ही नहीं जयवीर के पास 18,000 हजार का बिल भेज दिया गया है।

इलेक्ट्रानिक मीटरों ने उपभोक्ताओं के दिलों की धड़कने बढ़ा दी हैं। जिन उपभोक्ताओं के अभी तक सात या आठ सौ रुपये बिल आते थे उनके बिलों में अचानक कई गुना वृद्धि हो गई है। आनंद नगर के बुद्धीलाल के पास तो 32 हजार का बिल थमा दिया गया है। उपभोक्ता बिलों में संशोधन कराने के लिए दफ्तराें की खाक छान रहे है। अधिकारियो के द्वारा उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।

12 जनवरी से जिले भर में लाइन लॉस रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के द्वारा घरों में लगे मैकेनिकल मीटर बदल कर इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जा रहे है। करीब तीन हजार मीटर बदले गए। अब कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि इलेक्ट्रानिक मीटर तेज चल रहे हैं। उपभोक्ताआें का दर्द यह है कि अभी तो मौसम ऐसा है कि बल्ब, टीवी के अलावा किसी में खपत नहीं है।

गर्मी के मौसम मेें तो पंखा और कूलर भी चलाना पडे़गा तब कनेक्शन कटवाने के अलावा कोेई दूसरा चारा नहीं बचेगा। सवाल यह है कि वास्तव में उपभोक्ताआें के कनेक्शनों पर बिलों में दर्शायी गई राशि के बराबर खपत हो रही है या फिर इलेक्ट्रानिक मीटर तेज चल रहे हैं।

मीटर लगवाने का नियम
कोई भी उपभोक्ता अपनी पसंद की कंपनी का इलेक्ट्रानिक मीटर लगवा सकता है। मीटर लगवाने से पहले उसे कंपनी का नाम बताना होगा, यदि कंपनी विभाग से अनुमोदित है तो उक्त कंपनी का मीटर लगाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद भी मीटर का परीक्षण विभाग की प्रयोगशाला में किया जाएगा। मानक पर खरा उतरने के बाद ही मीटर लगाया जाएगा। उपभोक्ता इतने झंझट में पड़ना नहीं चाहता। 95 फीसदी मीटर विभाग ने ही लगाए हैं। यहीं कारण है कि लोगाें को मीटर के तेज चलने की शंका बनी है।
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इलेक्ट्रानिक मीटरों लगने के बाद बिजली के बिलों में देयराशि बढ़ी है। जो लोग मीटर तेजी से चलने के  आरोप लगा रहे हैं, उनका दावा सही नहीं है। सभी मीटर अनुमोदित कंपनी के  हैं और टेस्टिंग के बाद लगाए गए हैं। इसके बाद भी किसी को शक है तो समाधान किया जाएगा। बिल जारी होने में तकनीकी खामी भी हो सकती है।-धनीराम मौर्य, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल, इटावा
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