वार्ड में रजिस्टरों को जांचते सीएमओ राजीव यादव।
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मुख्य चिकित्साधिकारी राजीव यादव ने बुधवार को जिला संयुक्त चिकित्सालय के महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रसूताओं की देखरेख में भारी कमियां मिलीं। वार्ड में भर्ती प्रसूताओं की न तो बीएचटी(बेड हेड टिकट) पाई गई और न ही इंट्रो डायरी। इस पर सीएमओ ने नाराजगी जता सीएमएस अशोक कुमार को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
बुधवार सुबह साढे़ 11 बजे सीएमओ राजीव यादव महिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएस अशोक कुमार जाटव से जच्चा-बच्चा वार्ड के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि अस्पताल के वार्ड में निर्माण कार्य चलने की वजह से सभी प्रसूताओं को बच्चों के साथ एमसीएच की बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है। सीएमओ वहां पहुंचे तो वार्ड में चारो ओर गंदगी मिली। बताया गया कि सफाई कर्मी चार माह से वेतन न मिलने से सफाई ही नहीं कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने यहां वार्ड इंचार्ज की टेबिल पर रखे ड्यूटी रजिस्टर को देखा तो किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी का समय नहीं था। जब इस बारे में सीएमओ श्री यादव ने वार्ड इंचार्ज नीतू से पूछा तो वह कुछ भी नहीं बता सकी।
इसके बाद उन्होंने वार्ड में मौजूद प्रसूताओं की बीएचटी के बारे में पूछा तो वह भी वार्ड में मौजूद नहीं मिली। सीएमओ ने मरीजों की इंट्रो डायरी दिखाने को कहा तो इंचार्ज मुंह ताकते रहे। उन्होंने सीएमएस से पूछा कि बिना बीएचटी और इंट्रो डायरी के प्रसूताओं को किस तरह से उपचार दिया जा रहा है। वह इसका कोई जवाब नहीं दे सके। प्रसूताओं की डिस्चार्ज स्लिप की कापी भी रिकार्ड में नहीं मिली। प्रसूता सीमा में खून की कमी मिलने पर सीएमओ नाराज हुए। वार्ड इंचार्ज से जानकारी ली कि क्या प्रसूता का हिमोग्लोबिन टेस्ट हुआ है। प्रसूता परवीन के शरीर पर भी सूजन देखकर उन्होंने उसके चेकअप के बारे में पूछा। वार्ड इंचार्ज माफी मांगने के अलावा और कुछ भी नहीं बता सकी। वार्ड की भारी अव्यवस्था को देख सीएमओ ने सीएमएस डा अशोक कुमार जाटव को फटकारते व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।
कर्मचारी बोले, चार माह से रोटी के लाले
इटावा। 100 विंग एमसीएच में तैनात वार्ड ब्वाय मदन, बादाम सिंह, सफाई कर्मी राहुल, दिनेश व फार्मासिस्ट रामदत्त ने बताया कि उन्हें चार माह से वेतन ही नहीं मिला है। ऐसे में वह अब तब तक कार्य नहीं करेंगे जब तक उन्हें उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिलता। कर्मचारियाें का कहना था कि शासन से उनका पैसा आ चुका है, लेकिन जानबूझकर सीएमस द्वारा उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। जबकि सीएमएस डा अशोक जाटव का कहना है कि उन्हें अभी तक कर्मचारियों के वेतन का पैसा नहीं मिला है।