इटावा। असाध्य से असाध्य रोगों को मर्म चिकित्सा पद्धति से ठीक किया जा सकता है। इसमें पद्धति में किसी प्रकार की चीर -फाड़ की जरूरत नहीं पड़ती है। साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। ये बात आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी ने आयुष सम्मेल में कही।
महोत्सव पंडाल में बुधवार को आयुष सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें होम्योपैथी के जनक सैमुअल हनीमैन के चित्र पर माल्यार्पण व आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया।
डॉ. सुनील ने कहा कि डायबिटीज, पोलियो, घुटने का दर्द, हृदयाघात व ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों का भी इलाज संभव है। उन्होंने बताया हथेलियों के बीच में तल हृदय मर्म पर दबाव डालने से नींद बहुत जल्दी आ जाती है। यह प्रक्रिया रोज शाम को सोते समय कर सकते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक होम्योपैथी डॉ. प्रेम कुमार अंबेडकर ने कहा होम्योपैथी के चिकित्सालयों में गंभीर बीमारियों के रोगियों की संख्या बढ़ी है। उन्हें आराम भी मिल रहा है। इस मौके पर लगी औषधियों की प्रदर्शनी का डॉ. जोशी, डॉ. अंबेडकर, डॉ. मनोज दीक्षित, डॉ.अरविंद कुशवाहा,डॉ. संतोष कुमार, डॉ.दर्शन शर्मा, डॉ.उमेश भटेले आदि ने अवलोकन किया।
सम्मेलन में डॉ के.के. निगम, डॉ. अनुषा दुबे, डॉ. श्री कांत, स्वेच्छा दीक्षित, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवम यूनानी अधिकारी डॉ. लोकेश कुमार सिंह, जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. मीरा संजय आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता डॉ. उमेश चन्द्र भटेले ने की। संयोजक डॉ. जेके तिवारी थे। संचालन डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. कमल कुमार कुशवाहा,,डॉ. मानवी शाक्या ने किया।
डॉ. केके सक्सेना, डॉ. ऊषा रानी चंद्राणी, डॉ. चंद्र शेखर,डॉ. राजेश तिवारी,डॉ. अरविंद, डॉ. ललित, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, डॉ. उत्कर्ष वर्मा, डॉ सुमन, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. नरेंद्र यादव, डॉ.आशीष दीक्षित आदि उपस्थित रहे।