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जसवंतनगर रामलीला मैदान में बनेगा पर्यटन और शोधकेंद्र

Tue, 30 Aug 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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जानकारी देते अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाई पी सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विश्व विरासत घोषित जसवंतनगर की ऐतिहासिक रामलीला और इसका विराट मैदान अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। ये रामायण और रामलीला विधा के बड़े शोध केंद्र के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा। इसको बनवाने के लिए प्रदेश सरकार ने डेढ़ करोड़ की पहली किश्त प्रदान कर दी है। ये जानकारी अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाई पी सिंह ने दी। उन्होंने स्वीकृत डिजाइन और नक्शे के आधार पर कार्य की शुरुआत को हरी झंडी दे दी।
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156 वर्षों से ज्यादा प्राचीन जसवंतनगर की मैदानी रामलीला की विश्वव्यापी ख्याति पर लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने दो वर्ष पूर्व प्रदेश के संस्कृति विभाग को यहां पंचवटी, मंच, तोरण द्वार बनाने के निर्देश दिए थे। इसे पर्यटन और शोधकेंद्र के रूप में विकसित करने की सलाह दी थी। रामलीला क्षेत्र में दो तोरण द्वार पिछले वर्ष ही तैयार हो गए थे। उसके बाद प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह और लोनिवि मंत्री शिवपाल सिंह के गृहनगर की इस रामलीला को पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने को केबिनेट बैठक में मंजूरी दी।

प्रथम चरण में 4.92 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक और रामलीला पर विश्वव्यापी ढंग से शोध करा रहे डा. वाईपी सिंह को इसका नोडल अधिकारी बना प्रथम चरण का कार्य सितंबर 2017 तक कराने के निर्देश दिए हैं। श्री सिंह एक साल से इसकी कार्ययोजना बनाने में जुटे थे। सोमवार को वह निर्माण विशेषज्ञों के साथ यहां पहुंचे और कार्ययोजना को हरी झंडी दे दी। डा. वाईपी सिंह ने बताया है कि लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव इसकी आधारशिला 30 सितंबर को रखेंगे।
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ये होगी खासियत
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा. वाईपी सिंह ने बताया कि पंचवटी शोध और पर्यटन केंद्र पर 19 से 20 करोड़ खर्च आएगा। अयोध्या हाल को पंचवटी के रूप में विकसित किया जाएगा। उसकी दीवारों पर टेरिकोटा, हस्तशिल्प, पेंटिंग, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, बंगाल आदि राज्यों की कला, कपड़ा, मेटल और लकड़ी के भित्ति चित्र बनेंगे। छत भी रामलीला कथा के विभिन्न कांड  के चित्रों से सुसज्जित की जाएगी। रामलीला से जुड़े वस्त्रों, हथियारों का म्यूजियम भी होगा। साथ ही स्टोर्स भी बनाए जाएंगे, ताकि रामलीला में प्रयोग होने वाले सामान रखे जा सकें। पंचवटी के करीब ही सीता जी की वृक्ष के पास बैठी मूर्ति लगेगी। रामलीला मैदान के पूर्वी कोने में स्थित लंका स्थल को विशाल मंच, गेस्ट हाउस, मीडिया, रिसर्च सेंटर, ऑडिटोरियम, ग्रीन रूम और विशाल रिटायरिंग रूम के रूप में विकसित कर देश भर की रामलीलाओं के भित्तिचित्रों से इन्हें सुसज्जित किया जाएगा। रामलीला मैदान की 120 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल को ऊंचा कर उसमें चार गेट सीता राम, चित्रकूट, अयोध्या और लंका के नाम से बनाए जाएंगे। 15 फीट ऊंचाई पर पूरी दीवार पर पौराणिक और रामकथा के चित्र होंगे।
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