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वर्षों बाद आज हनुमान जयंती पर बने तीन विशेष योग

Fri, 22 Apr 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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प्राचीन शिव मंदिर में माता अंजनी की गोद में विराजमान हनुमान जी। - फोटो : अमर उजाला
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कई वर्षों के बाद इस बार शुक्रवार 22 अप्रैल को हनुमान जयंती पर एक साथ तीन विशेष योग बने हैं। इससे हनुमान जयंती की महत्ता और बढ़ गई है। इस विशेष योग में हनुमान जी की विधि विधान के साथ आराधना करने से सभी मनोकामना पूर्ण होगी और साधक को सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ उसके कष्ट दूर होंगे।
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हनुमान जयंती का पावन पर्व शुक्रवार 22 अप्रैल को हर्षोउल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। इस बार हनुमान जयंती पर हनुमान जी की आराधना करने से न चूकें, क्योंकि 12 वर्ष बाद हनुमान जयंती पर बज्र योग, सिद्ध योग व राज योग बन रहे हैं। इन तीन योगों के साथ हनुमान जयंती सभी के लिए शुभ फलदायी बनी है।


प्राचीन शिव मंदिर चौगुर्जी के महंत भुवनेश मिश्र के अनुसार  शुक्रवार 22 अप्रैल को हनुमान जयंती पर बज्र योग चित्रा नक्षत्र में सुबह 6:27 बजे से शुरू होकर दूसरे दिन स्वाति नक्षत्र में सुबह 9:03 बजे तक रहेगा, जबकि सिद्धि योग सुबह 10:54 बजे से शाम 5:48 बजे तक रहेगा। उधर राज योग सूर्योदय से शुरू होकर अगले नौ घंटे तक रहेगा। इसके साथ ही उच्च के सूर्य, उच्च के शुक्र व सिंह राशि में गुरू के साथ चन्द्र व सूर्य की परस्पर दृष्टि बनी है।
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चमेली-बेला या चढ़ाएं कोई सफेद फूल- इटावा। विशेष महत्व लेकर आई हनुमान जयंती पर अगर साधक विधि विधान से हनुमान जी की आराधना करता है तो उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। शिव मंदिर चौगुर्जी के  महंत आचार्य भुवनेश मिश्र के अनुसार हनुमान जी की आराधना करते समय ब्रह्मचर्य का विशेष ध्यान रखें और चमेली या बेला के फूल की माला चढ़ाएं। अगर यह फूल उपलब्ध नहीं हैं तो किसी भी सफे द फूल की माला हनुमान जी को चढ़ाने से उनका विशेष आशीर्वाद मिलेगा। इसके साथ ही हनुमान जी को चोला चढ़ाने से भी मनोकामना पूर्ण होती है।


पूजा में चंदन, केसरी, सिंदूर, लाल कपड़े, पान युक्त बतासे का प्रयोग करें । बूंदी के लड्डू और मीठे पुए का भोग लगाएं। इन तीन योगों में पूजन से जिनको शनि पीड़ा है, उन्हें गुरू शुक्र के रहते मंगल की कृपा होेने से राहू जनित रोग नष्ट होंगे।



बज्र, सिद्ध व राज योग के अपने ही महत्व- इटावा। बज्र, सिद्धि व राज योग क ी अपनी अपनी अलग अलग महत्ता है। बज्र योग में साधक को सुरक्षा कवच प्रदान होता है। मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म इसी योग में हुआ है। वहीं सिद्धि योग में उपासना करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है हनुमान जी अष्ट सिद्ध के दाता कहे गए हैं। इसलिए इस योग में उपासना के अपने ही महत्व हैं। उधर राज योग राजनीत के क्षेत्र के लोगों के लिए फलदायी माना गया है।



पिलुआ महावीर व जुगरामऊ मंदिर पर लगेगा भव्य मेला- इटावा। हुनमान जयंती के पावन मौके पर जिले के पिलुआ ग्राम में यमुना तट स्थित प्राचीन पिलुआ महावीर मंदिर पर भव्य मेला लगेगा। यह आसपास के क्षेत्र का अकेला ऐसा मंदिर है, जिसमें हनुमान जी की लेटी प्रतिमा स्थापित है। यहां की खास बात यह है कि लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा को चाहे जितने भी लड्डुओं का भोग लगाओ, लेकिन मुख को भरा नहीं जा सकता।


मंदिर पर शुक्रवार भोर से ही हनुमान जी की आराधना शुरू हो जाएगी। मंदिर के महंत हरभजन दास के द्वारा आरती की जाएगी। इसके साथ ही जुगरामऊ स्थित हनुमान मंदिर पर भव्य मेला लगेगा और हनुमान जी की पूजा अर्चन करने क ो बड़ी संख्या में भक्त पहुंचेंगे।



शिव मंदिर में माता अंजनी क ी गोद में विराजे हैं हनुमान- इटावा। मोहल्ला चौगुर्जी स्थित प्राचीन शिव मंदिर में हनुमान जी की बाल प्रतिमा स्थापित है, जिसमें हुनमान जी माता अंजनी की गोद में हैं। माता अंजनी की गोद में विरोज हनुमान जी की यह एकमात्र प्रतिमा है, यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।


मंदिर में शुक्रवार को सुबह से ही हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा। भोर अभिषेक, श्रृंगार और पूजन के बार पांच बजे मंदिर के पट दर्शन को भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। दोपहर 12 बजे हनुमान जी के बाल रूप की आरती होगी और सुंदर कांड का पाठ चलता रहेगा। वहीं कटरा सेवाकली स्थित हनुमान जयंती पर हवन पूजन के साथ हनुमान जी की आरती व विशेष पूजन होगा और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाएगा।



संकट मोचन मंदिर पर लगेगा छप्पन भोग- इटावा। हनुमान जयंती के पावन मौके पर प्रधान डाकघर के सामने स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पर छप्पन भोग लगेगा। मंदिर के संस्थापक डा रामनारायण दक्षित ने बताया कि सुबह आठ बजे से सुंदरकांड पाठ का शुभारंभ होगा और दोपहर 12 बजे हनुमान जी के प्रकाट्योत्सव के साथ छप्पन भोग लगाया जाएगा। दोपहर एक बजे महाआरती होगी और इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर पर सात बजे छप्पन भोग वितरण के बाद  आठ बजे समापन आरती होगी।
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