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हजारों अति कुपोषित और भर्ती सिर्फ एक बच्चा

Sat, 07 Nov 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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इटावा। सरकार बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए जतन कर रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग उतना ही बेपरवाह बना हुुआ है। जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र का भी हाल बेहाल है। जिले में 11758 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में चिह्नित हो चुके हैं लेकिन यह केंद्र तकरीबन खाली पड़ा है। यहां एक मात्र बच्चा भर्ती है। वह भी इसी केंद्र में कार्यरत रसोइये का है।
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राज्य पोषण मिशन के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज गरीब परिवारों के बच्चों को कुपोषण से मुक्त किया जाना है। सरकार ने अगस्त माह में 1 लाख 47 हजार 276 बच्चों का वजन करवाया था जिससे पता चल सके कि इन नौनिहालों में कितने अति कुपोषण और कितने कुपोषण के शिकार हैं।
वजन के बाद आंकड़े चौंकाने वाले आए। बाल विकास पुष्टाहार विभाग जिले में जहां अतिकुपोषित बच्चों की संख्या महज चार-पांच सौ के आसपास मान रहा था। उसका यह आंकड़ा ध्वस्त हुआ और जिले में 11758 बच्चे अति कुपोषण यानि लाल श्रेणी के पाए गए। जबकि 41513 बच्चे कुपोषित अर्थात हरी श्रेणी के मिले। इस तरह जिले में कुल 53271 बच्चे कम या ज्यादा कुपोषण के शिकार पाए गए।
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सरकार की मंशा है कि इन कुपोषित बच्चों में जो ज्यादा गंभीर प्रकृति के हैं। उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भेजा जाए। जहां न सिर्फ इन बच्चों की बीमारी का इलाज हो बल्कि उन्हें भरपूर डाइट दी जाए। इसके लिए जिला अस्पताल में एनआरसी की व्यवस्था भी की गई है। इस केंद्र पर 10 बच्चों को एक साथ भर्ती करने के बेड मुहैया है। सरकार ने कई अन्य प्रकार की सहूलियतें भी दे रखी हैं।
कुपोषण दूर करने में कोई अड़चन न आए। इसके भी प्रबंध किए गए हैं। बाल विकास पुष्टाहार से जुड़े इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग को जोड़ा गया है। डाक्टरों की जिम्मेदारी है कि वह क्षेत्र भ्रमण करके या फिर आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों को देखें। यदि कोई बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है तो उसे इस केंद्र में रेफर करें। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस जिम्मेदारी को सही ढंग से निभाता नहीं दिख रहा।
केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि गत जनवरी माह से अब तक सिर्फ 93 बच्चों को यहां भर्ती किया गया। जबकि अति कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या हजारों में है। स्वास्थ्य विभाग को उनकी सुध नहीं है। वर्तमान समय में यहां सिर्फ ढाई साल को एक बच्चा दिव्यांशु भर्ती दर्शाया गया है। यह बच्चा भी यहां केंद्र में कार्यरत रसोइया हरीशचंद्र का है। बच्चे की मां मंजू ने बताया कि बुखार व पेट दर्द की शिकायत पर इसे भर्ती किया गया है।
केंद्र पर बच्चों के उपचार का जिम्मा संभाले बाल रोग चिकित्सक डा. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि जब यहां बच्चे नहीं आएंगे तो वह इलाज किसका करेंगे। बच्चों को यहां भेजने की जिसकी जिम्मेदारी है उसे निभानी चाहिए।
यह हैं सरकारी सहूलियतें
सरकार ने एनआरसी पर भर्ती बच्चों को लेकर कुछ सहूलियतें भी दी हैं। भर्ती और दवाएं पूरी तरह मुफ्त है। भर्ती के दौरान बच्चे की मां को हर दिन 100 रुपये देने का प्रावधान है। आशा या आंगनबाड़ी कार्यकत्री को भी बच्चे को लेकर आने पर 100 रुपये प्रतिपूर्ति राशि प्रदान की जाती है। बच्चे को 14 तक भर्ती किया जाता है। यदि समय ज्यादा लगना है तो डाक्टर की सलाह पर इसे बढ़ाया जा सकता है। यहीं नहीं डिस्चार्ज के बाद चार बार फॉलो अप कराया जा सकता है। हर फॉलोअप पर बच्चे की मां को एक दिन का 100 रुपये भत्ता देने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रति बच्चे की डाइट पर हर रोज 75 रुपये खर्च किए जाने हैं जिसमें बच्चे को अंडा, दूध, दलिया, खिचड़ी और फल देना नियमों में है।

लाल श्रेणी के 11758 बच्चों को पोषण आहार देकर 1768 को पीली श्रेणी में लाया गया है। इसी तरह पीली श्रेणी के 41513 में से 1431 बच्चे हरी श्रेणी में आए हैं। यह प्रयास का ही असर है। विभागीय स्तर पर अति कुपोषित बच्चों में गंभीर प्रकृति के बच्चे चिंहित किए जा रहे हैं। जिन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा।
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अनिल कुमार सिंह, डीडीओ एवं प्रभारी डीपीओ, इटावा
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