फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दश्ाी महाशिवरात्रि कहलाती है। सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक रहने वाली चतुर्दश्ाी शुद्धा कहलाती है। 17 फरवरी को चतुर्दश्ाी दोपहर 12 बजकर 38 मिनट से शुरू होगी जो 18 फरवरी को सुबह 9.04 बजे तक रहेगी। जिसमें प्रदोषकाल और महानिशीथ काल का महत्वपूर्ण पूजन समाहित है।
इस वजह से महाशिवरात्रि विद्धाशिवरात्रि कहलाएगी। चतुर्दश्ाी के स्वामी भगवान शिव है। प्रदोष और महानिशीथ काल का पूजन ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है इसलिए यह विशेष फलदायी महाशिवरात्रि कहलाती है। ईशान संहिता के अनुसार इस दिन ही ज्योर्तिलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था, इस कारण यह महाशिवरात्रि कहलाती है।
गुरु उच्च राशि में और वक्री है जिस कारण से पारिवारिक समस्या, कलह, बेटी या बेटे के विवाह या दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार का तनाव है तो प्रदोषकाल और महानिशीथ काल में भगवान शिव और पार्वती का पूजन करने से समस्या का निदान होगा।
शनि वृश्चिक राशि में रहेगा और बुध चंद्रमा की युति शनि की राशि मकर में होगी। इससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। चारो प्रहर के पूजन में ‘ऊं हौं जूं स:’ मंत्र का जप करें। शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा के लिए महानिशीथ काल में बिल्व पत्र, धतूरे का फूल, नैवैद्य और गुग्गुल की धूप से पूजन करते हुए नम: शिवाय, नम: शिवाय का जप करें। ‘जय योग’ होने के कारण नया कार्य, लेखन, राजनीति, ज्योतिष, प्रतियोगी परीक्षा के लिए उत्तम मुहुर्त है।
48 साल बाद गुरु शुक्र होंगे साथ
48 बरस बाद बनने वाले शिवरात्रि के दुर्लभ संयोग ने इस पर्व को और भी शुभ बना दिया है। गुरु के साथ इस महाशिवरात्रि पर शुक्र भी उच्च राशि में नजर आएगा, जो दुर्लभ ही नहीं, बल्कि शुभ समय लेकर आया है। शिवरात्रि के योग में किए गए उपाय से शिवजी के साथ ही विष्णु, लक्ष्मी और देव गुरु की भी कृपा प्राप्त होगी।
मंगलवार को वर्ष 1967 के बाद गुरु-शुक्र उच्च राशि में होंगे। बुध व चंद्र की युति मकर राशि में होगी। मंगल मित्र राशि मीन में होगा। वर्ष 67, 79, 91, 03 में महाशिवरात्रि के दिन गुरु उच्च राशि में था, पर शुक्र वर्ष 67 के बाद वर्ष 15 में गुरु के साथ उच्च राशि में नजर आ रहा है।
शिवरात्रि पर अधिकतर बुध और चंद्र की युति रहती है। शुक्र उच्च का होता है, इसलिए यह महाशिवरात्रि बहुत ही शुभ संयोग लेकर आई है। बुध चंद्र मकर राशि में है। जिन पर गुरु की पूर्ण सप्तम दृष्टि पड़ रही है, साथ ही उच्च का शुक्र भी मीन राशि में स्थित है।
जिस पर उच्च के गुरु की नवम् दृष्टि पड़ रही है। इस संयोग से 12 राशियों पर भी असर पड़ेगा। शिवरात्रि से एक दिन पहले सोमवार को जिले भर के मंदिरों में तैयारियों का दौर चला। मंदिरों में सजावट के साथ भक्तों की भीड़ को व्यवस्थित करने के बंदोबस्त किए जाते रहे।
कांवरियों के ‘बम भोले’ से गूंजा जिला
महाशिवरात्रि से एक दिन पहले सोमवार को पूरा जिला बम भोले के उद्घोष से गूंजता रहा। सोमवार को हजारों की संख्या में कांवरिए शहर से गुजरे। इनके लिए भंडारे का आयोजन किया गया। फर्रुखाबाद रोड पर नवीन मंडी के पास बाबा बर्फानी सेवा समिति ने भंडारा किया।
बीएसए दफ्तर के पास श्री आनंदेश्वर महाराज अमरनाथ बर्फानी सेवा मंडल ने भंडारे का आयोजन किया। इसमें देवेंद्र शर्मा, पवन वर्मा, ओमरतन कश्यप, आनंद अग्निहोत्री, राजेश कश्यप, सुदीप जैन, धर्मेंद्र सिंह चौहान, नितिन बंसल, केके कश्यप, अजय बाथम, अंशुमान कुदेशिया, रतेश कश्यप, आकाश कुशवाह, रवि पाल आदि का सहयोग रहा।
तहसील परिसर में श्री महाकालेश्वर सेवा समिति की ओर से भंडारे का आयोजन कराया गया। यहां रमाकांत सिंह, उदय पाल सिंह, श्रीचंद्र, क्रांति उर्फ भोले, पं. राजीव लोचन, सत्यनारायण चौबे आदि का सहयोग रहा।
ऐसे करें भोले बाबा की पूजा
पं. शिवकिशोर द्विवेदी ने बताया कि भगवान शंकर को बेलपत्र, बेर, गन्ना, दूध, जल, गंगाजल, फल, फूल, भांग और मिष्ठान भेंट करने से वह प्रसन्न होते हैं। साथ ही पूजा के दौरान 108 बार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे घर में सुख, समृद्धि व सद्भावना बढ़ेगी। भक्त उपवास रखें। रुद्राभिषेक से विशेष फल मिलता है।
रमायन मंदिर में लगेगा मेला
भरथना क्षेत्र के गांव रमायन के महादेव मंदिर में मेला लगेगा। मंदिर आधी रात को खोल दिया गया। इसके अलावा स्टेशन बजरिया स्थित आनंदेश्वर मंदिर, महेराचुंगी स्थित शिव मंदिर, छैराहा स्थित शिव मंदिर के साथ ही जिले भर के सभी शिवालय मंगलवार को दिनभर खुले रहेंगे।
भोले पर माथा टेको शनिदेव खुद करेंगे कृपा
भगवान शिव की आराधना और उनसे मिलने वाला फल किसी भी माह, किसी भी क्षण प्राप्त होता है। शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं, तो पूरा माह हर जगह बम बम भोले के ही स्वर सुनाई देते हैं। शिव की प्रसन्नता के बाद श्रद्धालुओं पर शनिदेव की कृपा भी बरसती है।
जानकारों का कहना है कि श्रद्धालु शिव को प्रसन्न कर कुंडली में शनि दशा के दोष को दूर क र सकते हैं। पौराणिक प्रसंगों की भी माने तो शनिदेव ने शिव भक्ति से नवग्रहों में ऊंचा स्थान पाया है। शनि महादेव के आदेश का पालन कर प्राणियों को उनके कर्मों के मुताबिक दंड देते हैं।
शिव को शिव षडाक्षरी मंत्र ऊं नम शिवाय बोलते हुए जल से अभिषेक कर गंध, अक्षत फूल चढ़ाएं। साथ में काले तिल भी अर्पित करें। भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाई जा सकती है।
यहां पहुंचेगा भक्तों का रेला
कालीबाड़ी स्थित शिवशक्ति मंदिर पूरा दिन खुला रहेगा। मंगलवार की रात मंदिर में चार पहर की पूजा होगी। नीलकंठ मंदिर परिसर को बिजली की रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मेला भी लगेगा। महिला व पुरु ष दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग लाइन होगी।
मंदिर सोमवार की आधी रात से भक्तों के लिए खोल दिया गया, जो शिवरात्रि के पूरे दिन खुला रहेगा। हमीरपुरा वाले बाबा मंदिर लखना के पास यमुना किनारे बने भगवान शंकर के हमीरपुरा वाले बाबा मंदिर जिले के प्रमुख मंदिरों में से एक है। शिवरात्रि पर मंदिर आधी रात से ही खोल दिया गया।
बीहड़ क्षेत्र में स्थापित होने के कारण यहां सुरक्षा के विशेष इंतजाम रहेंगे। शहर स्थित टिक्सी मंदिर दिन भर खुला रहेगा। यहां रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठान ज्यादा होते हैं। सरसईनावर के पास स्थित हजारी महादेव मंदिर के आसपास मेला लगेगा। मंदिर सोमवार की आधी रात से मंगलवार की आधी रात तक खुला रहेगा। चौगुर्जी मोहल्ला स्थित शिव मंदिर मंगलवार को पूरे दिन खुलेगा।
इस दिन शिवलिंग में प्रकट हुए थे भोलेनाथ
हर वर्ष फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। यह खास मौका है कि जब भक्त महादेव की विशेष पूजन कर उनकी कृपा पा सकते हैं। भगवान शिव का पूरा जीवन हमारे लिए प्रेरणास्रोत है। इनके जीवन चरित्र से हमें जीवन के कई अनमोल सूत्र मिलते हैं। शिव की आराधना सबसे सरल व सीधी मानी जाती है। भगवान शिव भक्तों पर कृपा करने को बहुत ज्यादा उन्हें इंतजार नहीं करवाते हैं।