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Etawah News: इटावाः ये गगन छूता हिमालय भारत की शान है...

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ृलि भारतीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते सांसद प्रो.रामशंकर कठेरिया व विधायक स? - फोटो : ETAWAH
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इटावा। इटावा महोत्सव पंडाल में शनिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के कई नामवर कवियों ने रचनाएं सुनाकर काव्य प्रेमियों को मदहोश कर दिया। कवि विनीत चौहान ने ये गगन छूता हिमालय भारत की शान है और गंगाजल हमारा मान है ईमान है, बिस्मिल, भगत, अशफाक जिनकी कोख से पैदा हुए दोस्तों दुनिया में उसका नाम हिंदुस्तान है कविता सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवियत्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना से किया। सुप्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने तू हवा है तो कर ले अपने हवाले मुझको, इससे पहले कि कोई और बहा ले मुझको, आईना बन के गुजारी है जिंदगी मैंने, टूट जाऊंगा बिखरने से बचा ले मुझको। जब उन्होंने अपनी अगली रचना हमें कुछ पता नहीं है हम क्यूं बहक रहे हैं, रातें सुलग रही हैं दिन भी दहक रहे हैं। जब से है तुमको देखा हम इतना जानते हैं, तुम भी महक रहे हो हम भी महक रहे हैं। बरसात भी नहीं पर बादल गरज रहे हैं, सुलझी हुई हैं जुल्फ़ें और हम उलझ रहे हैं पर श्रोताओं ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
गजेंद्र प्रियांशु ने काव्य पाठ करते हुए प्यार की होड़ में दौड़कर देखिए, झूठे बंधन सभी तोड़कर देखिए, श्याम रंग में जो मीरा ने चूनर रंगी, वो ही चूनर जरा ओढ़कर देखिए। तुम अगर साथ दो हाथ में हाथ में हाथ दो, सारी दुनिया को हम छोड़ दें। तुम हमारी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें। वो एक सपना दिखा रहे हैं या मुझको अपना बना रहे है, खड़े- खड़े मुस्कुरा रहे हैं न आ रहे हैं न जा रहे हैं।
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वरिष्ठ कवि डॉ. शिव ओम अंबर ने कहा कि लेखनी के पास हस्ताक्षर नहीं है, यक्ष-प्रश्नों के लिए उत्तर नहीं है। अग्निगर्भा कोख बंध्या लग रही है, अक्षरों के वंश में दिनकर नहीं है। ये न पूछें काफिला है किस जगह पे, इस डगर पे मील का पत्थर नहीं है। राजधानी में छिड़ी है बीन जबसे, बाँबियों में एक भी विषधर नहीं है। दुष्यंत नहीं काव्य का प्रतिमान मिला है, फिर अक्षरों के वंश को दिनमान मिला है। कई अन्य कवियों ंने अपनी रचनाएं सुनाईं।
इटावा के कवि डॉ.कमलेश शर्मा ने अपनी रचना कोई जाकर उन्हें यही बताना, अभी तो कई काम बाकी, झोला लेकर चले नहीं जाना सुनाई। इटावा के युवा कवि रोहित चौधरी ने काव्य रचना मैं भूषण की सिंह गर्जना खुद की ताकत रखता हूं, वंदे मातरम होठों पर और दिल में भारत रखता हूं।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन सांसद प्रो.रामशंकर कठेरिया व सदर विधायक सरिता भदौरिया ने दीप प्रज्जवलित कर किया। डीएम अवनीश राय ने दोनों जन प्रतिनिधियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। अध्यक्षता डॉ.विष्णु सक्सेना व शिव ओम अंबर ने की। संयोजक शांति स्वरूप पाठक व डॉ.कुश चतुर्वेदी थे। पंडाल में देर रात तक काव्य प्रेमी उपस्थित रहे।

काव्य पाठ करते डॉ. विष्णु सक्सेना। संवाद- फोटो : ETAWAH

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