इटावा। बारिश, आंधी के साथ ही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं हो सकेगी। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया जाएगा। पहले चरण में पांच जिलों में काम होगा इसमें इटावा को भी शामिल किया गया है।
शासन की ओर से बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आंधी, तूफान और बारिश इन कोशिशों पर सवाल उठाने का मौका दे देते हैं। वहीं कर्मचारियों की हड़ताल पर भी सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की बेवसी सारे दावों को फेल कर देती है। इन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार की ओर से अब ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए प्रोजेेक्ट तैयार किया गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। प्रदेश के सभी उपकेंद्रों पर पावर कॉर्पोरेशन की ओर से अब बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इनसे आपूर्ति बाधित होने पर संरक्षित की गई ऊर्जा से संंबंधित क्षेत्र को आपूर्ति दी जाने लगेगी। पहले चरण में प्रदेश के पांच जिलों का चयन किया गया है। इसमें इटावा को भी शामिल किया गया है। जिले के विभागीय अधिकारी आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। आदेश आने के बाद ट्रांसमिशन बिजली घरों पर जगह निर्धारित करके इन पर काम शुरू कराया जाएगा।
शासन की ओर से बनाई गई योजना के अनुसार, हर ट्रांसमिशन बिजली घर पर 10 मेगावाट के चार सिस्टम लगाए जाएंगे। इस तरह एक क्षेत्र में करीब 40 मेगावाट बिजली स्टोर हो सकेगी। इस उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को विषम परिस्थिति में औसतन 4 से 5 घंटे आपूर्ति दी जा सकेगी। इस सिस्टम में लीथियम बैट्री का उपयोग किया जाएगा। इसे सौर ऊर्जा से भी जोड़ने की तैयारी है।
बिजली विभाग के कर्मचारियों ने 16 मार्च रात 10 बजे से 72 घंटे की हड़ताल शुरू हुई थी। आधी रात मौसम खराब होने के बाद आधे से ज्यादा जिले की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए थे। जिले के हालात बिगड़ गए थे। अधिकारियों के प्रयास के बाद कुछ जगहों के हालत तो सुधरे थे, लेकिन कुछ जगहों के हालात कर्मचारियों के हड़ताल से लौटने के बाद बदल सके थे। जिले के लोगों को करीब तीन दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ा था।