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Etawah News: पत्थर की चमक है, न नगीने की चमक है, चेहरे पर...

Tue, 26 Dec 2023 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। इटावा महोत्सव के प्रदर्शनी पंडाल में रविवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं। युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव ने पत्थर की चमक है न नगीने की चमक है, चेहरे पर सीना तान कर जीने की चमक है। पुरखों से विरासत में हमें कुछ न मिला था, जो दिख रही है खून-पसीने की चमक है। रावण नहीं है मारना रोटी है कमानी। हम राम तो नहीं मगर ये बात भी सच है। हर आदमी की होती है राम कहानी...सुनाकर मध्य वर्ग खासकर युवाओं को मेहनत कर कमाने की सीख दी।
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कवि सम्मेलन की शुरूआत डॉ. सुमन दुबे ने सरस्वती वंदना से की। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपने प्रभावशाली काव्य पाठ से समाज की वर्तमान व्यवस्था और राजनीतिक विषयों पर जमकर हमला बोला। अभिराम पाठक ने कश्मीर जो पूजा की थाली में रखा पावन जल है। कश्मीर जो औषधीय के बीज मंत्र का अर्पण है। कश्मीर जो स्वर्ग लोक का इस धरती पर दर्पण है।

गीतकार विष्णु सक्सेना ने कविता की शुरुआत करते हुए कहा कि जैसे ही दिल बीमार सही हो वो दवाएं दें दे। मैं सबपे प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दें। ए मेरे रब में सांस- सांस में महक जाऊं, मेरी आवाज की खुशबू की हवा दे दें। इसके बाद कविता आपके नाम ने ही बंद हिचकियां कर दीं। धूप के होंठ पर पानी की बदरिया धर दीं। हर तरफ फूल है खुशबू है। खुशनुमा मौसम आपने जून के मौसम में सर्दियां कर दीं। प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं। जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हूं। यह मानता हूं मैं दौलत नहीं कमा पाया। मगर तुम्हारा हर एक गम खरीद सकता हूं।
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हास्य रस के बड़े हस्ताक्षर शंभू शिखर ने सुनाया दूल्हा बेचारा रील बनाने में रह गया। दुल्हन ने फेरे पंडित जी के साथ ले लिए। जैसे हास्य किस्से सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हास्य व विषयगत कवि गजेंद्र प्रियांशु ने अबकी फाल्गुन में जब शादियां आएंगी। जब घर में खुशियों की तब चाबियां आएंगी। खेल पबजी का खेलेंगे हम सब्जी तक, जब चांद से भाभियां आंएगी सुनाकर तालियां बटोरीं।
कवि कमलेश शर्मा ने जतन से संवारी कलम बोलती है कि बनकर दुधारी कलम बोलती है। जहां लोग अन्याय पर मौन रहते हैं वहां पर हमारी कलम बोलती है। कवयित्री मणिका दुबे ने चंद लम्हे मेरे हर पहर आपका। एक कोना मेरा और घर आपका। याद दिल से करोगे तो आ जाऊंगी मैं तो मेहमान हूं...सुनाकर वाहवाही लूटी।
हास्य कवि दिनेश बावरा ने कहा कि दूध मिला था कृष्ण राज्य में भी। राम राज्य में घी। मोदी राज्य में चाय मिली है। फूंक-फूंक कर पी। अभी दुनिया को सबसे ज्यादा खतरा आपकी जेब में रखे हुए चार इंच के मोबाइल से है। परेशान कर दिया है अभी मैं अपने बच्चों का बचपन देखा भी नहीं कि मोबाइल की दुनिया ने उसे जवान कर दिया है। हास्य कवि सुदीप भोला, ओज व वीर रस के कवि विनीत चौहान, दिनेश प्रभात ने भी अपनी रचना सुनाई। संचालन हास्य कवि दिनेश बावरा ने किया।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ सांसद डॉ.रामशंकर कठेरिया व सदर विधायक सरिता भदौरिया ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर व दीप जलाकर किया। कार्यक्रम संयोजक कार्यकारिणी सदस्य प्रेम शंकर शर्मा एडवोकेट ने अतिथियों व कवियों का शॉल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया।
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