इटावा। इस्लामिया इंटर कॉलेज के प्रवक्ता मो. अतीक यूं तो एक हाकी खिलाड़ी और कुशल अध्यापक के रूप में जाने जाते हैं। परंतु, उनका एक रूप और भी है। अतीक पढ़ाई में तेज मगर सामाजिक रूप से कमजोर बच्चों को गोद ले लेते हैं। उसे पढ़ाई में जहां भी जैसी भी जरूरत हो उसे पूरी करने में जी जान लगा देते हैं।
अतीक वर्ष 1992 में इस्लामियां इंटर कॉलेज के कामर्स प्रवक्ता एवं चीफ प्रोक्टर बने। चीफ प्रोक्टर होने के नाते उनका सभी विषयों के छात्रों से संपर्क रहता है। उनका कहना है कि एक टीचर का काम केवल बच्चों को केवल पढ़ाना ही नहीं उसको मार्गदर्शन देना भी होता है।
बच्चों को उनके भविष्य के प्रति जागृत करना भी एक टीचर की जिम्मेदारी है। उनके पढ़ाए हुए कई छात्र ऐसे हैं जिनकी सफलता पर उन्हें गर्व है। डॉ पीयूष तिवारी सर्जन हैं, डॉ. हिमांषु दुबे आर्थोपेडिक सर्जन और गौरव चौहान देश के जाने माने कवि हैं। इसके अलावा शिवांशु बाजपेई बंगलोर में इंजीनियर हैं। चक्रपाणि प्रियदर्शी एसबीआई में उच्च पद पर हैं। विकास सिंह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटे हैं।
उनका कहना है कि कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो किसी न किसी वजह से अपनी प्रतिभा सबके सामने उजागर नहीं कर पाते। उनकी निगाह ऐसे बच्चों पर रहती है। वे उन्हें ढूंढकर उनके साथ मेहनत करते हैं। उनको घर पर या एक्सट्रा क्लास के माध्यम से सभी विषयों की शिक्षा दिलाते हैं। अच्छे प्रकाशकों की किताबें मुहैया कराते हैं।
छात्र के शिक्षण में आने वाली बाधा को दूर करना उनका पहला काम होता है। यही कारण जब एक बार छात्र की प्रतिभा निखर जाती है तो वह आगे बढ़ता चला जाता है। उन्हें इस काम में खुशी मिलती है। जब कोई गोद लिया बच्चा सफल होता है तो उन्हें अपार खुशी मिलती है।
हमेशा हौसला बढ़ाया
इटावा। सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले विकास सिंह का कहना है कि अतीक सर ने हमेश उनका हौसला बढ़ाया है। वे एमबीए करने के बाद नोएडा में जॉब करने लगे थे। जॉब में संतुष्टि नहीं मिली, इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेेज में जाने की ठानी। सिविल सर्विसेज की तैयारी की। अतीक सर ने हाईस्कूल, इंटर तक उनके साथ बहुत मेहनत की। घर पर निशुल्क पढ़ाया। आज भी वे जब कहीं किसी दुविधा में होते हैं तो अतीक सर से परामर्श लेते हैं। हमारे गुरु जी श्रेष्ठ हैं, आदरणीय हैं।
अतीक सर जैसा दूसरा कोई नहीं
इटावा। रामलीला रोड निवासी शिवांशु वाजपेयी का कहना है कि कक्षा 8 से 12 तक वे इस्लामिया इंटर कॉलेज में पढे़। अतीक सर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। इसके बाद जहां भी जैसी भी मदद की जरूरत पड़ी। अतीक सर हर समय उसके साथ खडे़ नजर आए। अब बीटेक करने के बाद वे बंगलूरू में जॉब कर रहे हैं। उनकी सफलता में अतीक सर की हौसलाअफजाई और मेहनत का बहुत बड़ा योगदान है। उनके गुरु जैसा कोई दूसरा हो ही नहीं सकता।