मीना मंच के कार्यक्रम में बच्चों के साथ प्रधानाध्यापिका प्रतिभा तिवारी
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इटावा। उच्च प्राथमिक विद्यालय रामनगर की प्रधानाध्यापिका प्रतिभा तिवारी को इस वर्ष प्रदेश सरकार ने राज्य अध्यापक पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह पुरस्कार उन्हें यूं नहीं मिला इसके लिए उन्होंनेे लगातार सात सालों तक अपने काम को तपस्या मानकर किया। सात वर्षों की अथक मेहनत शिक्षा में नवाचार एवं गुड टच बैड टच के प्रति छात्राओं को जागरूक करने के उनके जुनून ने उन्हें सफलता के इस सोपान तक पहुंचाया है। जहां पहुंचना हर किसी की ख्वाहिश होती है।
प्रतिभा तिवारी की नियुक्ति वर्ष 2013 में उच्च प्राथमिक विद्यालय रामनगर में हुई। उस समय छात्र नामांकन केवल 56 था। क्षेत्र की बालिकाओं में तो शिक्षा के प्रति नकारात्मक विचारधारा थी। विद्यालय भवन बदहाल था, पीने का पानी, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थी। मोहल्ले के लोग विद्यालय के गेट के सामने ही कूड़ा डालते थे।
उन्होंने नगर पालिका के सहयोग से सबसे पहले लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। यथासंभव कार्यशालाओं का आयोजन किया। इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। डिजिटल इंडिया से उन्हें जनपद स्तर पर पुरस्कृत किया गया।
छात्र नामांकन बढ़ाना एक चुनौती लगी। नामांकन को लेकर सामुदायिक सहभागिता के लिए कार्यशालाएं कैंप आयोजित किए गए। स्कूल चलो-अभियान जोर शोर से चलाया गया। 2014-15 में विद्यालय का छात्र नामांकन बढ़ने लगा। नामांकन संख्या बढ़कर अब 116 हो गई।
वर्तमान पाठ्यक्रम नवाचारों एवं डिजिटल शिक्षा की दिशा में बच्चों के शैक्षिक अभिवर्धन एवं उन्नयन के लिए कंप्यूटर लैब सृजित की गई। जिन पर बच्चे डिजिटल कंटेंट बेस्ड मैटेरियल के लिए बच्चे कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का निदान करते हैं।
उन्होंने पूरे जिले मेें किशोरी शक्ति योजना के तहत छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक किया। आज इस अभियान का सकारात्मक असर देखने को मिला रहा है। प्रदेश सरकार ने उन्हें इस अभियान की सफलता और छात्र नामांकन में उल्लेखनीय योगदान के लिए ही इस वर्ष के राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चुना है।