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सेंच्युरी विभाग की अड़ंगेबाजी से कांयछी तक नहीं बन सका रास्ता

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इटावा। चकरनगर तहसील क्षेत्र में आने वाले सेंक्चुअरी क्षेत्र में आने वाला चकरनगर-भरेह मार्ग नहीं बन सका है। इससे कांयछी गांव की आबादी पलायन को मजबूर है।
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तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर कांयछी गांव प्राकृतिक छटा से भरपूर यमुना नदी किनारे बसा है। इस गांव को तीन ओर से प्रकृति ने अपने आंचल में संजोए हुए है। बीहड़ में स्थित यह गांव आजादी के रणबांकुरे के लिए अभेद्य पनाहगाह हुआ करता था। 500 की आबादी वाला यह गांव सिमट कर 200 पर पहुंच गया है।
गांव के लिए कोई रास्ता न होने के कारण लोगों का जीवन नारकीय हो गया है। यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि भी रास्ता निर्माण के लिए कोई प्रयास नहीं किया। बरसात में कच्चे खार के रास्ते में पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
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चकरनगर कस्बा चौराहा से राजपुर रोड पर वर्ष 1996 के लगभग क्षेत्रीय किसानों के लिए तेल और दाल मिल की स्थापना पंचायतीराज के तहत की गई थी। वन विभाग की अनुमति नही मिलने से परियोजना पूर्णतया ध्वस्त हो गई। स्थानीय ग्रामीण कहते हैं कि सेंक्चुअरी क्षेत्र का फायदा कुछ नहीं हुआ, बल्कि समस्याएं ज्यादा खड़ी हुई है। इस क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा यह सेंक्चुअरी क्षेत्र है। कोई भी विकास काम बिना वन विभाग की अनुमति के नहीं हो सकता।
ग्रामीण सरमन सिंह सेगर कहते हैं कि कांयछी ऐतिहासिक धरोहर को संजोने वाला गांव है। जिसके रास्ते का निर्माण होना बेहद जरूरी है। इस गांव में आने वाले लोग कच्चा रास्ता होने के कारण गांव तक नहीं आते हैं।
मनोज भदौरिया ने कहा कि रास्ता न होने के कारण आधी से अधिक आबादी पलायन कर नजदीकी कस्बों में बस गई है। आधुनिक दौर में भी चार पहिया वाहन गांव नहीं पहुंचता है। बरसात में तो यह गांव टापू बन जाता है।
कांयछी गांव का रास्ता हमारी प्राथमिकता में है। इस गांव की सड़क को हर हाल में बनवाया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष यह प्रस्ताव रखा जाएगा। - शैलेश चौहान, नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य
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