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बेटी के विदा होते ही कैंसर पीड़ित मां ने दुनिया छोड़ी

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बहादुरपुर गांव में कैंसर पीड़ित महिला की मंगलवार सुबह अचानक मौत हो गई। परिवार के गम से जुड़ी यह घटना इसलिए खास हो गई कि मानो महिला ने अपनी सांस की अंतिम डोर को बेटी की विदाई होने तक पकड़ रखा था। इधर, उसकी बेटी ससुराल को विदा हुई और उधर उसने अंतिम सांस ले ली।
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ब्लॉक क्षेत्र के बहादुरपुर गांव निवासी अरुण दुबे खेती पर निर्भर हैं। उनकी चार संतानों में तीन बेटियां और एक बेटा है। खेतीबाड़ी करके ही उन्होंने बच्चों की पढ़ाई लिखाई कराई। करीब तीन महीने पहले उन्हें पता लगा कि उनकी पत्नी बेबी को कैंसर हो गया है।
उन्होंने इलाज में काफी पैसा भी खर्च किया। कानपुर के बाद फिलहाल ग्वालियर से पत्नी का इलाज चल रहा था। मंगलवार को हुई उनकी मौत से लगा कि मानो वह सबसे छोटी बेटी के हाथ पीले होने तक अपनी मौत को रोके हुए थी। सोमवार को बेटी ज्योति की शादी कन्नौज जिले के छिबरामऊ थाना के अतिराजपुर गांव के शिवम तिवारी के साथ हुई।
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मंगलवार सुबह ज्योति की विदाई हुई। बेटी को विदा करते ही बेबी ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे हमेशा के लिए अपनआंखें मूंद ली। घर में मातम पसर गया। पत्नी की मौत से दुखी अरुण ने बताया कि बेहद बुरे वक्त से गुजर रहे हैं।
जैसे तैसे करके बच्चों को पढ़ाया लिखाया, बेटियों की शादी की। जो कर्ज चढ़ा था, वह भी किसी तरह उतार पाए थे। सोचा था कि अब आराम करने का समय आया है। तब पत्नी साथ छोड़ गई।
उन्होंने दुखी मन से बताया कि महज तीन महीने पहले पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। इटावा जिला अस्पताल में दिखाने पर जब कोई आराम नहीं मिला तो कानपुर ले गए थे। वहां जांच
में पता चला कि उनको कैंसर है। इलाज शुरू हुआ, फिर ग्वालियर ले गए। बेटी की शादी को लेकर वह बहुत खुश थी। मंगलवार को बेटी की विदाई के महज पांच मिनट बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में तमाम रुपये खर्च करने के बाद भी उनकी पत्नी को कोई आराम नहीं मिला।
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