विपक्षियों के निशाने पर रहने वाले मुख्यमंत्री के जिले में अव्यवस्थाओं का आलम है। जिले में चिकित्सा सेवाएं बदहाल हैं। जिला अस्पताल में वर्षों से डाक्टरों का अकाल है। इससे मरीज बेहाल हैं। बालरोग विशेषज्ञ, फिजीशियन और हृदयरोग विशेषज्ञ के पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
इधर मौसम की मार से मरीज बढ़ रहे हैं। डाक्टरों की कमी से उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। दूरदराज से आने वाले मरीज भटककर लौट जाते हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल में डाक्टरों के स्वीकृत 34 में से 15 पद खाली पड़े हैं।
गर्मी की शुरुआत के साथ ही बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ ही डायरिया के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। आए दिन बदल रहे मौसम से बीमारियां और हावी हो रही हैं। ऐसे में जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को मायूसी ही हाथ लग रही है।
डाक्टरों की तैनाती न होने से या तो मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है या फिर मौजूदा व्यवस्थाओं से ही संतोष करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बीमार बच्चों के माता-पिता को हो रही है। क्योंकि जिला अस्पताल में एक भी बालरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। फिजीशियन से लेकर हृदयरोग विशेषज्ञ के पद खाली पड़े हैं।
सीएमओ के अंडर में विशेषज्ञ डाक्टर तैनात हैं, उनसे प्रशासनिक कार्य से लेकर गैर जरूरी कार्य तो लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें जिला अस्पताल से अटैच नहीं किया जा रहा है। खुद सीएमएस ने बालरोग विशेषज्ञ डा. अनुराग श्रीवास्तव को जिला अस्पताल में अटैच करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा, लेकिन सीएमओ ने इस पत्र पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।