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फोटो 40::::नगला जयलाल गांव स्थित मकान में मौजूद प्रबल के मामा-पिता, ताऊ व अन्य परिजन। संवाद
- सुप्रीम कोर्ट में जजों से बदसलूकी करने का मामला, इटावा के नगला जयलाल भोली गांव का निवासी हैं प्रबल प्रताप यादव
- बीएड के बाद नौकरी नहीं मिली तो चले गए थे लखनऊ विवि से कर रहे थे एलएलबी
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने अपशब्द कहने वाला प्रबल प्रताप यादव भरथना तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भोली के गांव नगला जयलाल का रहने वाला है। प्रबल प्लानिंग के तहत सुप्रीम कोर्ट गया था। प्रबल की एक ईमेल पुलिस को मिली है, जिसमें उसने स्पष्ट लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा, पूरे देश में हाईलाइट हो जाऊंगा।
हालांकि प्रबल प्रताप के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने का कहना है कि बेटे के साथ साइबर फ्रॉड हुआ लेकिन किसी ने शिकायत भी सुनीं। हारकर उसने कोर्ट में अर्जी लगाई थी। आर्थिक तंगी के बीच सुनवाई न होने की वजह से वह तनाव में था इसलिए ही उससे शायद कोर्ट में गलती हो गई।
पिता ने बताया कि उनके दो बेटियां और एक बेटा प्रबल है। बेटियों की शादी कर चुके हैं। सिर्फ दो बीघा खेती है। प्रबल पढ़ाई करके अच्छी नौकरी करना चाहता था। तीन साल पहले चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज से बीएड किया था। सरकारी भर्ती नहीं निकलने से वह लखनऊ विवि से वकालत की पढ़ाई करने दो साल पहले चला गया था। वहां किराये के कमरे में रह रहा था। खर्चा चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाता था। एक निजी कंपनी में नौकरी भी कर रहा था। इस दौरान वह साइबर फ्रॉड का शिकार हो गया था। प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह ने बताया कि इस फ्रॉड की शिकायत उसने संबंधित थाने में की थी। पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया था, लेकिन किसी नहीं सुना। निचली कोर्ट से भी न्याय न मिलने पर प्रबल सुप्रीम कोर्ट में गया था।
देर रात तक तिलकनगर मार्ग थाने में था प्रबल, छुुड़ाने गया मामा का बेटा
सुप्रीम कोर्ट में हुए मामले के बाद तिलक मार्ग पुलिस ने प्रबल को हिरासत में ले लिया था। शनिवार रात नौ बजे तक वह पुलिस की हिरासत में ही था। जानकारी पर प्रबल के मामा का बेटा रवि उसे छुड़वाने के लिए गया था। फोन पर हुई वार्ता में उसने बताया कि पुलिस ने प्रबल को थाने में बैठा रखा है। शनिवार दोपहर को प्रबल का मेडिकल भी करा दिया गया है, पर जेल नहीं भेजा गया। बताया कि एसओ से वार्ता होने पर उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर छोड़ा जाएगा। रवि ने बताया कि प्रबल फ्रॉड के बाद से काफी परेशान चल रहा था। इसी वजह से उससे सुप्रीम कोर्ट में गलती हो गई।
तीनों मामा के सहयोग से प्रबल की हो पा रही थी पढ़ाई
पिता सुरेंद्र ने बताया कि प्रबल के तीन मामा हैं। तीनों पुलिस में हैं। एक सतवीर अलीगढ़ और राजेंद्र, रामनरेश दो मथुरा में तैनात हैं। बताया कि घर की पारिवारिक स्थितियां ठीक न होने की वजह से प्रबल को जहां भी पढ़ाई में आर्थिक सहयोग की जरूरत पड़ती थी, उसके मामा लोग ही सहयोग करते थे।
छह को ताऊ के ऑपरेशन के दौरान आया था आगरा
घर में ही रहने वाले ताऊ रविंद्र सिंह ने बताया कि उनका छह जुलाई को हार्ट का ऑपरेशन आगरा के एक अस्पताल में हुआ है। बताया कि ऑपरेशन के दिन प्रबल आगरा आया था। वह बहुत परेशान था। कहा था कि अब अंतिम लड़ाई लड़ने के लिए दिल्ली सुप्रीम कोर्ट जा रहा है। वहां से उसे न्याय जरूर मिलेगा। इस तरह की गलती उससे कैसे हुई पता नहीं। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर वीडियो चलने के बाद ही परिवार के लोगों को घटना की जानकारी मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट तक जाकर, पूरे देश में हाईलाइट हो जाऊंगा
- सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने अधिवक्ता ने आपत्तिजनक शब्दों का किया था इस्तेमाल
- इटावा के रहने वाले प्रबल प्रताप यादव ने ईमेल में लिखी थी ये बात
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने अपशब्द कहने वाला प्रबल प्रताप यादव इटावा के नगला जयलाल, भाली भरथना का रहने वाला है। प्रबल प्लानिंग के तहत सुप्रीम कोर्ट गया था। प्रबल की एक ईमेल पुलिस को मिली है, जिसमें उसने स्पष्ट लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा, पूरे देश में हाईलाइट हो जाऊंगा।
छानबीन में सामने आया है कि प्रबल अपने प्रकरण को उछालने और हाईलाइट होने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। यही वजह है कि उसने अपना मामला खुद लड़ने के लिए आवेदन किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विकासनगर स्थित डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी में काम करता था। नौकरी के दौरान उसने दो लड़कियों को परेशान किया था। इसमें एक हिंदू और दूसरी मुस्लिम युवती थी। दोनों युवतियों ने कंपनी के अधिकारियों से प्रबल की लिखित शिकायत की थी। इसके बाद कंपनी ने प्रबल को नौकरी से बाहर निकाल दिया था। कंपनी से बदला लेने के लिए उसने कंपनी पर कई तरह के भ्रष्टाचार, टैक्स चारी और गबन के आरोप लगाए थे।
यह है मामला
डुप्लेक्स टेक्नोलॉजीज सर्विसेज प्रा. लि. के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियमितता के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग को लेकर प्रबल ने स्पेशल सीजेएम कस्टम की अदालत में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया था, जबकि प्रबल केस दर्ज कराना चाहता था। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी। प्रबल ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश देने की मांग की थी कि कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। मांग पूरी नहीं होने पर वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां शुक्रवार को उसने अपशब्द भाषा बोले।