इटावा। शैक्षिक सत्र समाप्ति की ओर है। ठिठुरन भरी ठंड भी लगभग गुजर चुकी है लेकिन 20 हजार परिषदीय बच्चों को स्वेटर नसीब नहीं हुए। इन बच्चों को यूनिफार्म, बैग और स्वेटर आदि के लिए पैसा ही उपलब्ध नहीं हो सका। जिम्मेदार यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि इन बच्चों के अभिभावकों ने कई बार कहने के बाद भी केवाईसी अपडेट नहीं कराया।
जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 1484 विद्यालय संचालित हैं। इनमें पढ़ रहे बच्चों को यूनिफार्म, बैग, स्वेटर के साथ ही स्टेशनरी के लिए उनके अभिभावकों के खाते में प्रति छात्र 1200 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजे जाते हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई के खर्च का बोझ अभिभावकों पर न पड़े। इस वर्ष 1.20 लाख बच्चों के लिए धनराशि अभिभावकों के खातों में उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन एक लाख के लिए ही पैसा जारी हो सका। 20 हजार बच्चे ऐसे रह गए, जिनके अभिभावकों के खाते में धनराशि नहीं पहुंच पाई।
ऐसे में जिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक थी, उन्होंने अपने बच्चों को यूनिफार्म, जूता-मोजा दिला दिए। जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर रही उनके बच्चे बिना स्वेटर, जूता-मोजा के स्कूल पहुंच रहे हैं। जिला समन्वयक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि 12 हजार छात्राें के सत्यापन का काम चल रहा है, जबकि आठ हजार छात्रों के आधार कार्ड ही नहीं हैं। इनके आधार बनवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सत्र समाप्ति तक शत प्रतिशत डीबीटी की धनराशि अभिभावकों के खातों में भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्जन
जिन बच्चों के अभिभावकों को डीबीटी की धनराशि नहीं मिली है, उनके आधार का सत्यापन कराया जा रहा है। कुछ का सत्यापन हो चुका है। उन्हें यह धनराशि स्थानांतरित की जा रही है। शेष सभी बच्चों के लिए डीबीटी धनराशि जल्द स्थानांतरित कर दी जाएगी।
-डाॅ. राजेश कुमार, बीएसए