इटावा। सुबह और शाम की कड़ाके की सर्दी व शीतलहर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो रही है। जिला अस्पताल और आसपास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शरीर के गिरते तापमान और कंपकंपी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अजय शर्मा के अनुसार इमरजेंसी वार्ड में ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनका शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ चुका है और वे बोलने की स्थिति में नहीं हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में हाइपोथर्मिया कहते हैं।
डॉक्टर ने बताया कि जब शरीर की गर्मी उत्पन्न करने की क्षमता कम हो जाती है और तापमान 95 डिग्री फारेनहाइट से नीचे चला जाता है तो अंग काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में तत्काल इलाज न मिलने पर जान का खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों में इस तरह के 20 से अधिक मामले सामने आए हैं।
इटावा के नुमाइश मैदान, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास रात गुजारने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं। प्रशासन द्वारा रैन बसेरों की व्यवस्था के बावजूद, कड़ाके की सर्दी में खुले में काम करने वाले मजदूर इस बीमारी का अधिक शिकार बन रहे हैं।
डॉक्टर के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति का शरीर अत्यधिक ठंडा पड़ जाए तो उसे तुरंत गर्म कंबल में लपेटें। धीरे-धीरे गुनगुना पानी या तरल पदार्थ पिलाएं। मरीज को सीधे आग के पास ले जाने से बचें और शरीर का तापमान सामान्य होने दें।
-लगातार और तेज कंपकंपी होना।
-बोलने में लड़खड़ाहट और शरीर में सुस्ती छाना।
-हाथ-पैरों का सुन्न पड़ जाना।
-सांस की गति धीमी होना।