टेंपर्ड मीटरों ने बिजली विभाग के अभियानों की हवा निकाल दी है। अब ऐसे मीटरों की जांच मौके पर ही की जाएगी। इसके लिए 2.60 लाख की लागत से दो एक्वाचेक मशीनें खरीदने के लिए आर्डर दिया गया है।
उपभोक्ताओं से भी विभाग ने मीटर को टेंपर्ड कराने से बचने का सुझाव दिया है। गौरतलब है कि लॉइन लॉस को राष्ट्रीय स्तर 15 फीसदी पर लाने के लिए विभाग ने 12 जनवरी से 28 फरवरी तक अभियान चलाया था। इसमें विभाग ने संदेह होने पर 42 बिजली मीटरों को जांच के लिए परीक्षण खंड सुंदरपुर प्रयोगशाला में भेजा था।
इनमें से 33 मीटर टेंपर्ड यानि अत्यधिक धीमी गति से चलते पाए गए हैं। दो मीटर धीमी गति और महज सात मीटर सही पाए गए। इस रिपोर्ट के बाद विभाग के होश उड़े हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि लाइन लॉस रोकने के लिए बिजली विभाग ने पुराने मीटरों के स्थान पर ज्यादातर उपभोक्ताओं के घरों के बाहर इलेक्ट्रोनिक मीटर लगा दिए हैं। यह काम ठेकेदारों को दिया गया है। बताते हैं कि जो कर्मचारी मीटर लगाने जाते हैं वही पांच सौ से एक हजार रुपये तक तक उपभोक्ता से लेकर मीटर को टेंपर्ड कर कर देते है।
टेंपर्ड होने के बाद मीटर की गति सामान्य से काफी धीमी हो जाती है। प्राइवेट तौर पर काम करने वाले भी कुछ लोग मीटर को टैंपर्ड करने में माहिर माने जाते हैं। बिल कम आने के लालच में उपभोक्ता यह काम करवा लेते हैं। अब इलेक्ट्रोनिक मीटरों को ऑन स्पॉट चेक करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है।
सिक्योर कंपनी उदयपुर (राजस्थान) से विभाग 2.60 लाख रुपये कीमत की दो एक्वा चेक मशीनें खरीदने का निर्णय लिया है। आगे से चलने वाले अभियानों में उक्त मशीन की मदद से ऑन स्पॉट मीटर चेक किए जाएंगे।