तापमान के लगातार नीचे लुढ़कने से सक्रिय हुए रोटा वायरस ने मासूम बच्चों को शिकार बनाना शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल तथा मेडिकल केयर यूनिट की ओपीडी में कोल्ड डायरिया से पीड़ित बच्चे लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट क्लीनिकों पर भी बड़ी संख्या में बीमार शिशु पहुंच रहे है।
जिले में पीडियाट्रिक्स की कमी के चलते शिशुओं के इलाज में दिक्कत आ रही है। जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक्स के दो पद हैं, जिनमें से एक रिक्त होने तथा दूसरे के अवकाश पर होने के कारण शिशुओं क ो उपचार मिल पाना मुश्किल हो रहा है।
जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक्स के दो पदों में एक पद सालों से खाली पड़ा है। दूसरे पर डॉ. नरेंद्र सिंह हैं लेकिन वे 24 दिसंबर तक अवकाश पर हैं। ऐसे में मरीजों को पीजीआई के लिए रेफर करना पड़ रहा है। कुछ शिशुओं को स्वयं सीएमएस डॉ. वीएस अग्निहोत्री अपने चैंबर में देख रहे है।
डाक्टरों का कहना है कि कोल्ड डायरिया रोटा वायरस के संक्रमण से होता है। इस बीमारी में शिशु को लूज मोशन होने लगते हैं। नाक बहने व लार के माध्यम से शिशुओं के शरीर का पानी बाहर निकल जाता है। पानी की कमी व संक्रमण के कारण शिशु 24 घंटे में ही बेहाल हो जाता है।
जिन शिशुओं को जन्म के दो माह बाद टीकाकरण नहीं किया गया, उन शिशुआें में रोटा वायरस का अटैक अधिक होता है। जैसे ही तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे उतरता है वैसे ही शिशुओं में कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। दो साल तक के शिशुओं क ो वायरस के अटैक की संभावना ज्यादा रहती है।