जसवंतनगर/इटावा। फरवरी में ही 33 डिग्री पारा होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। गेहूं की फसल के लिए पारा सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। बालियां निकल रही हैं। ऐसे में गेहूं का दाना कमजोर हो सकता है। इससे किसान परेशान हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने उन्हें सिंचाई बढ़ाने की सलाह दी है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्तूबर के शुरुआती दिनों में हुई बारिश ने फसल चक्र प्रभावित कर दिया था। जिन खेतों में धान की फसल खड़ी थी, वह बारिश के कारण कट नहीं पाई थी। गेहूं की जो फसल अक्तूबर की शुरुआत में बोई जाती थी, वह नवंबर के मध्य में बोई गई। अभी ज्यादातर गेहूं की फसल में बालियां निकलना शुरु हुई हैं। इन्हें कम तापमान की जरूरत है। कृषि मौसम वैज्ञानिक एएस रस्तोगी के मुताबिक जब गेहूं की फसल तय समय पर की जाती है, तब जनवरी की शुरुआत में बालियां आ जाती हैं और दाना बनना शुरू हो जाता है। जनवरी में अधिक ठंड होने से यह फसल के लिए मुफीद होता है। इससे गेहूं की फसल अच्छी होती है।
देरी से जो फसलें बोई गई हैं, उन्हें अब मुफीद तापमान नहीं मिल रहा है। बालियां निकलने का समय है और पारा 33 डिग्री तक पहुंच चुका है। ऐसे में इस बार गेहूं की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। किसानों की चाहिए कि वह सिंचाई बढ़ा दें। खेत की मिट्टी को सूखने न दें।