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Etawah News: माता रानी के स्वागत को तैयार, मंदिरों में किया शृंगार

Wed, 22 Mar 2023 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। देवी मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र बुधवार से शुरू होगा। मंदिरों और घरों में इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के कालीबांह, लखना के कालिका देवी और बलरई के ब्रह्माणी देवी मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ जुटती है। यहां सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। माता रानी के स्वागत के लिए मंगलवार को भक्तों ने पूजन सामग्री की खरीदारी की। महिलाओं ने चुनरी, कलश, बताशे, चौकी आदि सामान खरीदा।
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नारियल की दुकानों पर भी भीड़ रही। एक नारियल 40 से 50 रुपये में बिका। कालीबाड़ी, पुरोहितन टोला स्थित मां आनंदी देवी सहित अन्य मंदिरों में सजावट की गई। मंदिरों के बाहर नवरात्र की पूर्व संध्या से ही मेले जैसा नजारा दिखा।
घट स्थापना का चार घंटे है शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य राजीव अग्रवाल के अनुसार नवरात्र में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त बुधवार को सुबह चार घंटे है। सुबह 6:33 से लेकर 10:33 बजे तक विधि विधान से घट स्थापना कर सकते हैं। पूजा करते समय मंदिर की वेदी में दुर्गा जी की फोटो, चुनरी, लाल कपड़ा, आम के पत्ते, चावल, दुर्गा सप्तशती, लाल धागा, गंगाजल, चंदन, नारियल, जौ के बीज, मिट्टी का सकोरा, गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग इलायची आदि पास रखें।
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सीसीटीवी कैमरों से रहेगी नजर
मां कालिका देवी मंदिर के प्रबंधक रविशंकर शुक्ला ने बताया कि खोया-पाया शिविर लगाया गया है। सीसीटीवी कैमरे के जरिये नजर रहेगी। प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह चौहान ने बताया कि कस्बे के बाईपास बस तिराहे पर बैरियर लगाया गया है। वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी के साथ मंदिरों का निरीक्षण करके व्यवस्था परखी जा रही हैं। चिह्नित 23 मंदिरों में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

माता सती की बांह गिरने से नाम पड़ा काली बांह
इटावा। शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर ग्वालियर रोड स्थित कालीबांह मंदिर का इतिहास 500 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां मां महाकाली, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां हैं। पुजारी सचिन गिरी ने बताया कि माता सती की बांह इस स्थान पर गिरने की वजह से मंदिर का नाम कालीबांह पड़ा है। नवरात्र में यहां चार आरती होती हैं। पहली आरती तड़के तीन बजे, दूसरी भोर साढ़े चार बजे, तीसरी दोपहर को तीन बजे व शयन आरती रात नौ बजे होती है। दशमी को मातारानी का शृंगार किया जाता है। मंदिर परिसर में लगने वाले मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीओ सिटी व कोतवाल मुस्तैद हैं। पेयजल, प्रकाश व्यवस्था व सफाई के संबंध में नगर पालिका परिषद को अवगत कराया गया है। (संवाद)


ब्रह्माणी देवी मंदिर में झंडे चढ़ाने की है परंपरा
जसवतंनगर। नगर से करीब 18 किलोमीटर दूर गांव बलरई के घने बीहड़ों में स्थित ब्रह्माणी देवी मंदिर में नौ दिन तक मेला लगता है। मनोकामना पूरी होने पर यहां बड़ी संख्या में भक्त झंडे चढ़ाने पहुंचते हैं। वह बैंडबाजों के साथ और लेटकर परिक्रमा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं। पुजारी प्रेम किशोर ने बताया कि मंदिर में सुबह छह बजे व शाम सात बजे आरती होती है। झंडे चढ़ाने आने वालों के लिए मंदिर परिसर तक पहुंचने की व्यवस्था की गई है। सीओ अतुल प्रधान ने बताया कि मेले में पुलिस तैनात रहेगी। एक किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग की गई है। (संवाद)



संगीता ने समाज सेवा को ही मान लिया आराधना

इटावा। शहर के करमगंज निवासी संगीता अग्रवाल दस साल से समाजसेवा कर रही हैं। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद कर उनकी बेटियों की शादी भी कराई है। जायंट्स सहेली की ओर से उनकी मदद कर रही हैं। समय- समय पर स्वास्थ्य शिविर लगवाती हैं। पिछले दिनों स्कूलों में नेत्र शिविर लगवाकर 250 से अधिक बच्चों की जांच करवाई और चश्मे वितरित किए थे।

संगीता असहाय लोगों के लिए पिछले महीने हड्डी रोग शिविर भी लगवा चुकीं हैं। वह राशन व गर्म वस्त्र वितरित करने, गर्मी से श्रमिकों को बचाने के लिए अंगौछे वितरित करने जैसे कार्यों में भी आगे हैं। जिला महिला चिकित्सालय की ओर से उन्हें उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित भी किया जा चुका है। दो दिन पूर्व उन्हें सुषमा स्वराज अवार्ड मिला है। वर्तमान में वह जायंट्स वेलफेयर फाउंडेशन की फेडरेशन ऑफिसर हैं। वह मेडिकल हेल्थ कैंप और मदर चाइल्ड केयर के लिए काम कर रहीं हैं।

संगीता का कहना है कि कन्या जीवन का आधार हैं। मातृ शक्ति नहीं होगी तो सृष्टि भी नहीं चल पाएगी। कन्या भ्रूण हत्या रोकनी है। कन्याओं को पूरी सुरक्षा मिले, उन्हें जीवन जीने का अधिकार मिले, तभी आदि शक्ति की पूजा करने की सार्थकता होगी। (संवाद)
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