ताखा तहसील के बालापुर में प्राचीन ठाकुर जी के मंदिर की 22 बीघा बेशकीमती जमीन को कुछ लोगों ने फर्जी वसीयत बनाकर बेच दिया।
ग्रामीणों की आपत्ति के बाद भी जमीन का दाखिल-खारिज कर दिया गया। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत सांसद रामशंकर कठेरिया से की है।
ठाकुर जी मंदिर को ताखा गांव के गयादीन पाठक के तीन पुत्रों रामबहादुर, शिवशंकर और हरसहाय ने अपनी 1.78 हेक्टेयर जमीन दान में दी थी। महंत गोपाल दास के शिष्य बाबा करनदास को मंदिर का सर्वाकार बना दिया था।
नियमानुसार मंदिर की जमीन सर्वाकार बेच नहीं सकते। उधर, कुछ लोगों ने फर्जी बैनामा कराकर जमीन बेच दी। मामले में बालापुर गांव के रामरतन यादव ने तहसीलदार ताखा के यहां मंदिर की जमीन का दाखिल-खारिज कराने को लेकर आपत्ति दाखिल की।
ग्रामीण राजवीर, सतीश सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने मंदिर की जमीन को फर्जी तरीके से बेचने को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसकी शिकायत सांसद रामशंकर कठेरिया से की है।
सांसद ने मामले में जांच करवाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया है। मामले में तहसीलदार ताखा श्रीराम यादव ने बताया कि वसीयत के आधार पर बैनामा हुआ था। इसी पर दाखिल खारिज किया गया है।
सर्वाकार होने पर जमीन विक्रय नहीं की जा सकती है। अपर जिलाधिकारी जीपी श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में क्या नियम है यह देखना पड़ेगा उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बालापुर गांव में ठाकुर जी का प्राचीन मंदिर है। मंदिर से 22 बीघा भूमि लगे होने के बाद भी मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है ।
ग्रामीण बताते हैं कि पहले मंदिर में अष्टधातु की मूर्तियां थी, लेकिन उनका भी पता नहीं चल सका। ग्रामीणों ने मंदिर की जमीन सहित उसकी देखभाल प्रशासन से अपने हाथों में लेने की मांग की है।