शिक्षकों की नाराजगी से बोर्ड परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य प्रभावित है। अभी तक विद्यालयों से रिलीव होने के बाद भी 50 फीसदी से अधिक परीक्षक केंद्र पर ज्वाइन करने नहीं आए हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाआें का मूल्यांकन करने के लिए बोर्ड ने 1361 विभिन्न विषयाें के परीक्षक आवंटित किए हैं।
इनमें से मात्र 629 ने मूल्यांकन कें द्रों पर उपस्थिति दर्ज कराई है। दो दिन का समय गुजर जाने के बाद भी मात्र 17,622 उत्तर पुस्तिकाआें का ही मूल्यांकन कार्य हो पाया है। यदि यही हाल रहा तो समय पर मूल्यांकन कार्य खत्म हो पाना मुश्किल होगा।
बोर्ड परीक्षाआें का मूल्यांकन कार्य कराने के लिए पूर्व की तरह इस बार भी दो केंद्र बनाए गए हैं। हाईस्कूल का मूल्यांकन जीआईसी इटावा में तथा इंटरमीडिएट का हिंदू विद्यालय इंटर कालेज में हो रहा है। दोनाें कें द्रों के लिए बोर्ड ने करीब 6.50 लाख उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन कार्य के लिए आवंटित की है।
मूल्यांकन कार्य के लिए बोर्ड से 1361 परीक्षक तथा 143 उपमुख्य परीक्षक चयनित किए गए है। मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार किए जाने की घोषणा के चलते इनमें से 50 फीसदी से भी कम 629 परीक्षकाें ने अभी तक ज्वाइनिंग दी है जबकि कुल आवंटित 143 उप मुख्य परीक्षकों में से ही अभी तक 27 ने उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
दो दिन गुजर जाने के बाद भी अब मात्र 17,622 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो पाया है। जीआईसी में तो अभी तक हाईस्कूल की 3901 उत्तर पुस्तिकाआें का ही मूल्यांकन हो पाया है। हिंदू विद्यालय कें द्र पर 13,721 उत्तर पुस्तिकाआें का मूल्यांकन हो पाया है।
विभागीय अधिकारियाें की ओर से दावा किया जा रहा कि समय पर मूल्यांकन करा लिया जाएगा। यदि परीक्षक नहीं आए तो रिटायर्ड विषयाध्यापकों की सेवाएं ली जाएंगी। वास्तव में मूल्यांकन का बहिष्कार किए जाने से दोनों ही केंद्रों पर मूल्यांकन का कार्य बुरी तरह से लड़खड़ा गया है। यदि ऐसा ही रहा तो समय पर मूल्यांकन खत्म होना मुश्किल होगा। जिसका सीधा असर बोर्ड के परिणाम पर भी पड़ सकता है।