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Etawah News: 40 की उम्र के बाद दिखते लक्षण... सही समय पर इलाज से बचा सकते आंखें

Thu, 14 Mar 2024 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। 40 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा के लक्षण दिखाई देते हैं। सही समय पर इसकी जानकारी हो जाने पर 80 से 90 प्रतिशत तक आंखों की रोशनी सही इलाज से बचाई जा सकती है। यह जानकारी बुधवार को आयुर्विज्ञान विवि में चल रहे ग्लूकोमा सप्ताह के तहत मरीजाें को दी गई।
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कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह ने किया। नेत्र विज्ञान विभाग की प्रो. रीना शर्मा ने ओपीडी में आए मरीजों को बताया कि ग्लूकोमा एक बेहद गंभीर बीमारी है। इसे आम बोलचाल में हम काला मोतियाबिंद कहते हैं। अगर समय पर इस समस्या का निदान न किया तो आंख की रोशनी भी जा सकती है। इसीलिए ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि हानि के लिए सही जानकारी बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अधिकतर ग्लूकोमा के लक्षण 40 वर्ष के बाद दिखते हैं। इसीलिए जिन लोगों की आयु 40 वर्ष हो चुकी है। वह अपनी आंखों का रुटीन चेकअप अवश्य कराते रहें। ग्लूकोमा दो प्रकार के होते हैं। प्राइमरी ओपन एंगल ग्लूकोमा (पीओएजी) में आंखों पर प्रेशर बढ़ने से ऑप्टिक नर्व में सिकुड़न होने लगती है। इससे नजर खराब होती है और धीरे-धीरे ओपन एंगल ग्लूकोमा की शिकायत होती है। इसमें मरीज को पहले किनारे से धुंधला दिखता है। बाद में पूरी आंख खराब हो जाती है। लक्षण का सही समय पर पता चलने पर सही इलाज मिलने पर 80 से 90 प्रतिशत तक का डेमेज रोका जा सकता है।
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दूसरे प्रकार का प्राइमरी क्लोज एंगल ग्लूकोमा (पीएनएजी) होता है। इसमें एक प्रकार का तरल पदार्थ जो आंखों को पोषण देता है, उसका प्रवाह रुक जाता है। इससे मरीज के सर में तेज दर्द, दिखाई कम देना, आंखें लाल होना, उल्टी और चक्कर आना, धुंधलापन, बार-बार चश्में का नंबर बदलना, अंधेरे में जाने पर चीजों पर फोकस कम होना, साइड विजन का नुकसान होना जैसे लक्षण देखे जाते हैं।
नेत्र विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रवि रंजन ने बताया कि यदि यह लक्षण बार-बार दिख रहे हों तो सावधानी बरतें और तुरंत आंखों का परीक्षण कराएं। नेत्र विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग है उन लोगों में ग्लूकोमा का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए वह समय-समय पर अपनी आंखों का रुटीन चेकअप अवश्य करवाएं।


ओपीडी में कराई जांच 53 मरीजों में मिला ग्लूकोमा
ओपीडी में आए लोगों को जागरूक करने के लिए मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक, पोस्टर व अन्य प्रदर्शन सामग्री के साथ जागरूक किया। ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट होने का संदेश दिया। ओपीडी में 258 व्यक्तियों ने आंखों का परीक्षण कराया। इसमें 53 मरीज ग्लूकोमा से ग्रसित मिले।
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