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Etawah News: ठंड से फेफड़ों में आ रही सूजन, फूल रहा दम

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इटावा/सैफई। कड़ाके की ठंड में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल और सैफई में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सोमवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ही करीब 3000 मरीज आए। इनमें सांस रोगी क रहे। चिकित्सकों के मुताबिक, ठंड से फेफड़ों में सूजन आ रही है। इससे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
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ठंड के कारण कमजोर फेफड़ों वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। सांस फूलने से यह अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। इसके अलावा, ठंड के कारण त्वचा के रोगी भी बढ़े हैं। सोमवार को करीब 150 त्वचा रोगी पहुंचे। इनमें से अधिकांश को हाथ, पैरों में सूजन और खुजली होने की शिकायत है। ठंडक की वजह से खिंचाव हो रहा है। वहीं, करीब 500 मरीज खांसी, जुकाम और बुखार के आ रहे हैं। मरीज बढ़ने के कारण जांच के लिए भी लाइन लग रही हैं। हालत यह है कि जांच के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ रहा है।
बैठने के पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से लोगों को ठंडी जमीन का सहारा लेना पड़ रहा है। पुरानी ओपीडी में कमरा नंबर 47 के बाहर सोमवार को बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रही। राम कुंवर (65) निवासी अछल्दा जिला औरैया को व्हीलचेयर पर लेकर उनका बेटा खड़ा था। बेटे सौरभ ने बताया कि लगभग एक घंटे से इंतजार कर रहे हैं। बैठने का पास में कोई इंतजाम नहीं है। पैर में चोट लगने की वजह से मैनपुरी के अंशुल के पैर में दर्द हो रहा था। वह सोमवार को अस्पताल में दिखाने आया था। वह जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। उसने बताया कि करीब पौने घंटे से इंतजार कर रहा है।
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फेफड़े कमजोर होने की वजह से हो रही सांस की दिक्कत

प्रो. डॉ. आदेश कुुमार ने बताया कि फेफड़े कमजोर होने की वजह से लोगों में सांस की दिक्कत हो रही है। सर्दियों की दिनों में सूजन आ जाती है। वहीं कई मरीजों की नली सिकुड़ने लगती है। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे मरीजों को सर्दी और प्रदूषण से बचना चाहिए। गांव में चूल्हों पर काम करने वाली महिलाओं में भी इस तरह की समस्याएं आ रही हैं।




इस मौसम में धूम्रपान घातक

डॉ. आदेश कुमार ने बताया कि इस मौसम में धूम्रपान कमजोर फेफड़े वाले मरीजों के लिए घातक है। जिन्हें पहले कोई समस्या फेफड़ों संबंधी रह चुकी है। वह किसी भी तरह के धूम्रपान से बचें। धूम्रपान की वजह से अक्सर सांस नली में सूजन आ जाती है। वहीं मरीजों बैक्टीरियल और वायरल दोनों संक्रमण होने का डर हो जाता है।
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