विकास भवन के ऑडीटोरियम हॉल में बुधवार को किसान गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर डीएम नितिन बंसल ने कहा कि बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे लेखपालों से दोबारा कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को क्षेत्र में जाकर सर्वे कार्य को तत्परता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम ने बताया कि किसानों को तात्कालिक सहायता के तौर पर अब तक जिले को मिली 27 करोड़ रुपये की धनराशि बांटी जा चुकी है। अब दोबारा सर्वे के आकलन के आधार पर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अब सिंचित क्षेत्र के लिए सहायता राशि 12 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
असिंचित क्षेत्र के लिए यह 4500 से बढ़ाकर 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसलों का बीमा अवश्य कराएं। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से निर्धारित अवधि में लोन लेने पर एक प्रतिशत धनराशि बीमा प्रीमियम के रूप में ली जाती है।
डीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वह अतिशीघ्र किसानों, बैंकर्स और बीमा कंपनियों की संयुक्त बैठक करें और किसानों को फसल बीमा की जानकारी दें। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वह नई तकनीकों का प्रयोग करें। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन आदि योजनाओं को अपनाएं। प्रशासन, किसानों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर सीडीओ डा. अशोक चंद्र ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह नलकूप एवं नहर से संबंधित शिकायतों पर अविलंब कार्रवाई करें। उन्होंने किसानों से कहा कि वह अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करें।
इससे लागत में कमी आएगी। किसान नई प्रजाति के बीजों का प्रयोग करें। सीडीओ ने जैविक खेती की जरूरत पर जोर देते कहा कि इसके प्रति किसानों में जागरूकता लाई जाए। उपनिदेशक कृषि एसके सिंह ने बीजों, सोलर पंप में अनुदान आदि योजनाओं की जानकारी दी।
इस दौरान जिला उद्यान अधिकारी डीपी यादव, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक आरबी मौर्य, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव आदि अधिकारी व किसान मौजूद रहे।