सुदिति ग्लोबल एकेडमी में मंगलवार को कला एवं संस्कृति को समर्पित संस्था स्पिक मैके एवं शब्दम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ख्यातिलब्ध कत्थक नृत्यांगना विद्या गोरी ने छात्राओं को कत्थक नृत्य की बारीकियां बताईं। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति एवं कला से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
नृत्यांगना विद्या गोरी ने बताया कि कथा कहे सो कत्थक कहलाए, कत्थक कदम ताल, चक्कर और गति का मिश्रण है। यह एक सहज एवं स्वाभाविक नृत्य है। इसके माध्यम से हम पौराणिक एवं धार्मिक प्रसंगों की प्रस्तुति दे सकते है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
सरस्वती वंदना प्रियांजल, नेहा, संध्या, प्रतीक्षा, जीनू ने प्रस्तुत की। इस दौरान शब्दम के प्रतिनिधि शशीकांत पांडेय, भारत विकास परिषद संस्कार शाखा के संजीव चतुर्वेदी के अलावा रजनी, अलका, आशीष दुनैरिया, शिवम शुक्ला, ललित अग्निहोत्री, रवींद्र , प्रगति, आराधना, रोहित वर्मा, सरस्वती वर्मा, नूतन मिश्रा आदि मौजूद रहीं।
मालूम हो कि स्पिक मैके संस्था देश के नामचीन कलाकारों के साथ विद्यालयों में कार्यशालाएं आयोजित कराती रहती है। शब्दम संस्था का प्रमुख उद्देश्य हिंदी का प्रचार प्रसार करना है। कत्थक नृत्यांगना विद्या गोरी दूरदर्शन कलाकार हैं। उनको प्रारंभिक प्रशिक्षण बनारस शैली के प्रसिद्घ कत्थक गुरु जफर मुल्ला ने दिया है।