अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जिला प्रमुख डॉ. पद्मा त्रिपाठी ने कहा है कि कोरोना महामारी ने शिक्षा को भी पूर्ण रूप से प्रभावित किया है। लिहाजा उन्हें विकल्प दिया जाए।
शिक्षा की दृष्टि से वह समय छात्रों के वर्ष भर की गई मेहनत को परखने का समय था, लेकिन महामारी के कारण विद्यार्थियों की परीक्षा संभव नहीं हो सकी है। इस कारण छात्र मानसिक दबाव व कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के सभागार में वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा पर अगर गौर करें तो प्रदेश में छह केंद्रीय, 31 राज्य, 8 डीम्ड और 29 निजी विश्वविद्यालय मिलाकर कुल 74 विश्वविद्यालय हैं
जिनमें से कुछ विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा और कुछ विद्यालय सेमेस्टर के आधार पर परीक्षा को संपादित करवाते हैं। परीक्षाएं लॉकडाउन के कारण अकस्मात रोकनी पड़ी।
एबीवीपी का मत है कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण जब तक जन जीवन सामान्य नहीं हो जाता अथवा इस महामारी का कोई हल नहीं निकलता है तब तक परीक्षाएं नहीं करवाई जानी चाहिए।
अगले सत्र में टाइम मैनेजमेंट करके अनियमित सत्र को नियमित किया जाए ऐसा पूर्व में भी कई संस्थाओं द्वारा किया जा चुका है।
डॉ.पद्मा त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा दी जाए जो पारंपरिक ऑनलाइन परीक्षा के बजाए किसी एप के द्वारा या छात्रों के मोबाइल पर बहुविकल्पीय परीक्षा के माध्यम से करवाई जा सकती है।
इस परीक्षा को कम प्रश्न एवं कम समय के आधार पर संपादित कराया जाए। इसके अतिरिक्त छात्रों के असाइनमेंट बनवाकर उनको मेल या व्हाट्सअप, गूगल फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन ही मूल्यांकन किया जाए।
वार्ता के दौरान जिला संयोजक हिमांशु तिवारी, जिला छात्रा प्रमुख तान्या मिश्रा, संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी, विभाग संयोजक मृतुन्जय चौधरी, हिमांशु दुबे, अनुज पुरोहित, अक्षय प्रताप सिंह, अंशुमान वर्मा, अभिषेक कठेरिया, पवन चौधरी, अभिषेक राठौर आदि उपस्थित रहे।