शहर स्थित कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज से सरायभूपत फाटक तक बनी 7.35 किलोमीटर सड़क तीन महीने भी नहीं टिक सकी। 313.53 लाख रुपये लागत से बनी सड़क जगह-जगह धंस गई है।
पीडब्ल्यूडी खंड सीडी वन द्वारा बनवाई गई इस सड़क पर पेचवर्क करके अपनी कमियां छुपाने की कोशिश की जा रही है। इस सड़क का काम पिछले साल मई से शुरू हुआ था और इस साल फरवरी में पूरा हुआ था। इसकी देखरेख का जिम्मा पीडब्ल्यूडी के दो जेई अंबिका प्रसाद और पीसी श्रीवास्तव के पास था।
इसके बाद इसकी हालत अब ऐसी हो गई है कि यहां पर पेंचवर्क कराना पड़ा है। पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव भले सार्वजनिक तौर पर विभागीय मुलाजिमों को गुणवत्तापरक काम करने के निर्देश देते हों लेकिन इसका असर उनके जिले में ही नहीं दिख रहा।
सड़कों पर लाखों रुपये खर्च होने के कुछ ही दिनों के बाद सड़क पर गड्ढे नजर आने लगते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज से सरायभूपत फाटक तक बनी सड़क इसका उदाहरण हैं। यहां काम फाइनल हुए तीन महीने भी नहीं बीते कि सड़क उखड़ने लगी है। अपनी यह खामी छिपाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसरों ने आनन-फानन में गड्ढों को पेंचवर्क से भर दिया।
गुणवत्ता का नहीं रखा गया ख्याल
मानक के मुताबिक 7.35 किमी लंबी इस सड़क में 1.04 किमी का हिस्सा बोगी एक्शन के तहत आता है। इसका मतलब यह कि इतने हिस्से में सड़क की मिट्टी सही नहीं है। सड़क की लागत में इसके लिए अलग से मानक भी तय किए गए। इसमें 30 सेमी बालू और साढ़े सात सेमी मोटाई के तीन कोट बड़े पत्थरों के डालना प्रस्तावित था।
इसके बाद डाबरयुक्त गिट्टी का बीएम कोट और सबसे ऊपर इसी तरह की महीन गिट्टी (एसडीबीसी) का कोट बिछाना मानक में शामिल रहा है। शेष सड़क पर सिर्फ एसडीबीसी करना प्रस्तावित रहा है। मजे की बात यह कि यह नई बनी सड़क बोगी एक्शन वाले हिस्से में भी उखड़ रही है।
भारी वाहन निकलने का बना रहे बहाना
तीन माह में सड़क ध्वस्त होने के बारे में सीडी वन के एक्सईएन सुनील कुमार श्रीवास्तव भारी वाहन निकलने का बहाना बना रहे हैं। बोले कि हैवी लोडेड वाहनों के गुजरने से सड़क नहीं टिक पाई। उल्लेखनीय है कि इसी मार्ग पर पीडब्ल्यूडी और एक अन्य व्यक्ति का मिक्सर प्लांट लगा है। वहां से डाबरयुक्त गिट्टी की सप्लाई होती है।
यहीं से गिट्टी लेकर वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। सवाल यह कि जब विभाग को पता है कि उसका मिक्सर प्लांट यहां लगा है तो सड़क को उतनी ही अच्छी क्वालिटी का क्यों नहीं बनाया गया? आखिर पैसे की बर्बादी क्यों होने दी गई?