सरसईनावर के सारस पक्षी विहार में पानी की तलाश में उड़ते सारस।
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मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल सरसईनावर के सारस पक्षी विहार में सारस बूूंद- बूंद पानी को तरस रहे हैं। लाखों रुपये पानी की तरह सारसों के संरक्षण के लिए खर्च होने के बावजूद सारसों के लिए ही पानी की व्यवस्था न होने से उनकी जान पर बन आई है ।
ताखा तहसील के सरसईनावर स्थित हजारी महादेव मंदिर के आसपास के क्षेत्र को वेटलैंड क्षेत्र घोषित किया गया है। नम भूमि होने की वजह से सारस के रहने के लिए यह आदर्श भूमि है। यही वजह है कि शासन ने इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने के लिए लाखों रुपये यहां के प्रचार- प्रसार के लिए ही खर्च कर दिए हैं। साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 50 लाख की लागत से पर्यटक आवास भी बनवाया है।
यही नहीं पर्यटकों की सुविधा हेतु वाच टावर भी बनवाए गए। इतना सब कुछ तो हुआ है, लेकिन सारस के संरक्षण के लिए उन्हें जल तक वन्य विभाग उन्हें उपलब्ध नहीं करवा पाया है। जल के अभाव में सारस वेटलैंड क्षेत्र को छोड़कर जल की तलाश में इधर उधर भटकते रहते है।
पर्यावरण प्रेमी अभिलाष सिंह यादव का कहना है कि बड़े भूमि में स्थित वेटलैंड के एक छोटे से कोने में जल मात्र उपलब्ध है , जो सारस के लिए अपर्याप्त है। यही वजह है कि सारस इधर - उधर भटकते रहते हैं।
इस संबंध में उनका कहना है कि वेटलैंड क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बीते माह पर्यटन विभाग ने सरसईनावर-ऊसराहार मार्ग इटावा फर्रुखाबाद मार्ग के कई स्थानों पर गड़े बोर्ड लगाकर सारस पक्षी विहार का प्रचार- प्रसार कराया गया है। अफसोस इसके बावजूद सारस को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में एसडीएम दिनेश सिंह ने बताया कि पक्षी विहार में पानी की कमी का मामला उनकी जानकारी में आया है। इसमें पानी भरवाने की व्यवस्था कराई जा रही है।