इटावा। बदलते मौसम और बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई है। इससे खरीफ फसलों पर कीटों का खतरा बढ़ गया है। जिले में 66 हेक्टेयर में बोई गई धान की फसल पर तना छेदक और सूंडी का प्रकोप दिख रहा है।
कीटों के हमले से धान की पत्तियां पीली पड़ रही हैं और सूखने लगी हैं। किसान उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में धान की फसल में कई कीटों का प्रकोप हो सकता है। इनमें दीमक, जड़ की सूंडी, पत्ती लपेटक, तना भेदक, हरे और भूरे फुदके शामिल हैं। दीमक पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाती है। जड़ की सूंडी के प्रकोप से पौधे पीले पड़ने लगते हैं। ऐसे में खेतों की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार बताते हैं कि तना छेदक कीट तने में घुसकर नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। अधिक प्रकोप पर प्रभावित पौधे सूख भी सकते हैं। देवेंद्र कुमार ने तना छेदक से बचाव के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल के छिड़काव की सलाह दी है। किसान डेढ़ सौ एमएल क्लोरेंट्रानिलिप्रोल को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव कर सकते हैं।