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करोड़ों खर्च पर नहीं सुधरे हालात

Thu, 14 May 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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मुख्यमंत्री के वीआईपी जिले में करोड़ों रुपये बिजली पर खर्च किए गए लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। 24 घंटे बिजली के फरमान के बाद भी कई बार होने वाली ट्रिपिंग से बिजली 16 घंटे भी नहीं मिल पा रही। अफसरों से बात करो तो बदहाली के लिए वे सब स्टेशनों की पुरानी मशीनों को दोषी बताते हैं।
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गौरतलब है कि शहर की बिजली व्यवस्था में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने रीइस्ट्रक्चर एसीलेटिड पावर डवलमेंट रीफोरम्स प्रोग्राम (आरएपीडीआरपी) योजना के तहत 38 करोड़ रुपये दिए थे।

इस योजना के तहत 120 में 118 ट्रांसफार्मर रखने, स्वीकृत 206 में से 200 किमी मीटर एलटी लाइन तथा 45 किमी लंबी 11 केवीए की लाइन बदलने का दावा है लेकिन उपभोक्ताओं को बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार दिख नहीं रहा।
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चौबीस घंटे में कई बार ट्रिपिंग होने और घंटों के लिए सप्लाई बाधित हो जाने के कारण आम आदमी की दिनचर्या के साथ कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। विकल्प के तौर पर लोगोें को जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए दो साल के भीतर शहर में फ्रें डस कालोनी, सीवेज प्लांट के पास रामलीला रोड, गुरूतेग बहादुर सेतु, राजा का बाग क्षेत्र में करीब 20 करोड़ की लागत से 33/11 केवीए के सब स्टेशनों का निर्माण कराया गया है। इनमें से तीन तो विभाग ने  चालू भी कर दिए है।

पुराने सब स्टेशनों में से इंजीनियरिंग कालेज तथा सुंदरपुर की मशीनें भी बदल दी गई है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को निर्बाध सर्प्लाई नहीं मिल पा रही। ग्रामीण क्षेत्र का तो और भी बुरा हाल है। 

सपा सरकार आने के बाद स्थानीय उपभोक्ताआें को बिजली सप्लाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद रहती हैं क्योंकि सरकार बदल जाने पर इटावा के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। सपा की सरकार में इस बार करोड़ों रुपये मेंटीनेंस पर खर्च करने के बाद भी हालात में सुधार न दिखने से लोगों की उम्मीदें टूटने लगी है। 

लाइन लॉस छिपाने के लिए होता है पावरकट
एक साल में चलाए गए अभियान के  बाद शहर में उपभोक्तओं की संख्या 40 हजार से भी अधिक बढ़ गई है। ढाई हजार से अधिक लोगों के  लोड बढ़ा दिए गए हैं। 90 फीसदी घरों के बाहर मीटर भी लगवा दिए गए हैं।

इसके बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार महसूस नहीं किया जा रहा है। लाइन लॉस अभी 45 फीसदी के ऊपर बना हुआ है जबकि इसे राष्ट्रीय स्तर 15 फीसदी पर लाया जाना है। ऑफ द रिकार्ड अधिकारी स्वीकारते हैं कि लाइन लॉस छुपाने के लिए पावरकट करना विभाग की मजबूरी है।

ओवरलोडिंग रोकने में छूटा पसीना
24 घंटे आपूर्ति देना तब तक  संभव नहीं है जब तक ओवरलोडिंग खत्म होगी। विभाग ने ट्रांसफार्मरों पर होने वाली ओवरलोडिंग रोक ने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। यहां तक कि एसडीओ तथा  अवर अभियंताआें की जिम्मेदारी भी निर्धारित कर दी गई है। इसके बाद भी विभाग को ओवरलोडिंग रोकने में पसीना छूट रहा है।
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तापमान बढ़ते ही ओवरलोडिंग के  कारण मशीनें हीट पकड़ जाती हैं और ट्रिपिंग शुरू हो जाती है। और उपभोक्ताओं क ो घंटाें तक पावरकट का सामना करना पड़ता है।

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