बेमौसम बारिश से बर्बाद गेहूं की फसल का असर अब सरकारी खरीद पर दिख रहा है। जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य 40,500 क्विंटल रखा गया है लेकिन अभी तक महज 336 क्विंटल गेहूं की खरीद संभव हो पाई है।
इस बड़े लक्ष्य की पूर्ति कैसे होगी। इसे लेकर अधिकारी खुद पसोपेश में हैं। खरीद केंद्रों का आलम यह है कि वहां अमूमन सन्नाटा पसरा रहता है। इक्का-दुक्का किसान ही आ रहे हैं।
गौरतलब है कि इस बार जिले में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए कुल 88 केंद्र खोले गए हैं जिनमें खाद्य विभाग के छह, पीसीएफ के 41, यूपीएसएस के 32, कर्मचारी कल्याण निगम के चार, यूपीएग्रो के तीन और भारतीय खाद्य निगम यानि एफसीआई के दो केंद्र शामिल हैं।
गत पहली अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई है लेकिन अभी तक महज 366 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका है। इसके लिए 89 किसानों को 1450 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के हिसाब से 48.80 लाख रुपये का भुगतान आरटीजीएस के जरिए बैंक खाते में किया गया है।
खाद्य विभाग डिप्टी आरएमओ आरएन पाल कहते हैं गेहूं खरीद में तेजी लाने के लिए आढ़तियों को भी लगाया जा रहा है। जिले में कुल 37 आढ़तियों को फिलहाल चिह्नित किया गया है। प्रदेश सरकार इन आढ़तियों को डेढ़ प्रतिशत कमीशन देगी।
केंद्रों पर धनराशि की कमी नहीं है। मार्केटिंग के केंद्रों पर 20-20 लाख, कल्याण निगम केंद्रों पर 10-10 लाख और शेष केंद्रों पर पांच-पांच लाख रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार ने किसान को 10.88 रुपये प्रति क्विंटल कटौती मुक्त खरीद का लाभ दिए जाने की घोषणा की है। हालांकि अभी शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
सरकार की छूट भी दिख रही बेअसर
केंद्र व प्रदेश सरकार ने इस बार गेहूं खरीद में किसानों को कुछ रियायतें देने की घोषणा की है लेकिन किसानों पर इसका भी खास असर नहीं दिख रहा। खाद्य विभाग के डिप्टी आरएमओ आरएन पाल बताते हैं कि गत वर्ष तक गेहूं की खरीद पर प्रति क्विंटल 32.63 रुपये सिकुड़े हुए दाने और फीकी चमक के एवज में काटे जाते थे जिसमें 29 रुपये सिकुड़े हुए दाने पर और 3.63 रुपये फीकी चमक होने पर कटते थे।
इसे केंद्र सरकार ने घटाकर सिर्फ 10.88 रुपये कर दिया। चूंकि बेमौसम बारिश से गेहूं का दाना काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में सिकुड़े दाने की कटौती को 7.25 रुपये कर दिया गया और फीकी चमक की कटौती यथावत रखी गई। केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश सरकार ने भी किसानों को राहत दी है।
इसके तहत किसान का गेहूं भले ही सिकुड़ा हुआ हो, चमक में कमी हो, उससे किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। यह 10.88 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती एफसीआई तो करेगी। लेकिन इसकी भरपाई किसान से नहीं बल्कि प्रदेश सरकार करेगी। इसके अलावा किसानों से गेहूं की उतराई और छनवाई भी नहीं ली जा रही है। जिले में यह आठ रुपये प्रति क्विंटल ली जाती रही है। यह लेबर चार्ज भी प्रदेश सरकार वहन करेगी।
खरीद केंद्रों पर सन्नाटे में गुजर रहे दिन
जिले में गेहूं खरीद की रफ्तार इस कदर थमी हुई है कि शुरुआती 20 दिन सन्नाटे में ही गुजर गए। पक्का तालाब स्थित मार्केटिंग विभाग के खरीद केंद्र पर बसरेहर ब्लाक के नगला छती गांव निवासी एक मात्र किसान राम मनोहर सिंह चौहान अपना गेहूं बेचते दिखे। एक ट्रैक्टर ट्राली में वह करीब 40 क्विंटल गेहूं लेकर आए थे।
केंद्र प्रभारी विवेक सायण ने बताया कि केंद्र पर दो हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य है लेकिन अब तक सिर्फ 59 क्विंटल की खरीद संभव हो पाई है जबकि वह कई गांव में जाकर किसानों से गेहूं बेचने का आग्रह भी कर चुके हैं। इससे पहले एक किसान का 19 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है।