लुधियानी गांव में रामजानकी मंदिर के बाहर तैनात पुलिस फोर्स
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बकेवर- भरथना। रामबाग स्थित श्री रामजानकी ठाकुर मंदिर इलाके के लोगों के लिए आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन यहां महंत पद को लेकर शुरू हुआ विवाद ग्रामीणों को भी दो खेमे में बांट दिया है। विवाद से तौबा करने वाले साफ तौर पर क ह रहे हैं कि महंत पद तो बहाना है। विवाद की मूल वजह करीब 50 बीघा जमीन है। अपने पक्ष में ग्रामीणों को लामबंद करने की वजह भी जमीन ही दिखाई जा रही है।
बताते हैं कि आश्रम के नाम उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में करीब 350 बीघा जमीन ही महंत बनने के पीछे विवाद का कारण है। मंदिर आश्रम लुधियानी और आसपास के गांव भरईपुर, नगला खादर, नगला भजू,रामबाग के लोग अपनी अपनी पसंद महंत बनवाना चाहते हैं।
यह आश्रम करीब 30 बीघा में बना है। उसके बाहर 20 बीघा अतिरिक्त जमीन है। अन्य जमीनें दूसरे जिलों में हैं। आश्रम का ही रामकृष्ण संस्कृत पाठशाला संचालित है। मंदिर की प्राचीनता के बारे में कोई सटीक प्रमाण तो नहीं है।
लेकिन, ग्रामीणों के अनुसार रामबाग आश्रम लुधियानी का मंदिर का निर्माण करीब दौ सौ वर्ष पूर्व हुआ था। मंदिर पर उस समय कोई ठडे़श्वरी महाराज महंत के रूप में थे । उनके स्वर्गवास के बाद रामदास जी फलाहारी महाराज मुख्य महंत बनाए गए।
उनके स्वर्गवास के बाद वृंदावन दास महामंडलेश्वर महंत बने थे। वृंदावन दास के बाद परमानंद दास आश्रम के मुख्य महंत बने थे । महंत परमानंद दास का उज्जैन कुंभ में 8 मई को निधन हो गया। इसके बाद महंती को लेकर गतिरोध पैदा हो गया।
रामबाग आश्रम मुख्य महंत बनाने प्रक्रिया में महंत अपने सामने ही किसी दूसरे को समाज की सहमति से तिलक कर महंत बना देता था। न रहने की स्थिति में सर्व सम्मति से चयन कर महंत बनाया जाता है।
लेकिन इस बार विवाद की स्थिति बन गई है। 17 जून के भंडारे पर रोक लगने के संबंध में महंत अवधेशानंद बताते हैं कि महंतों व संतों के पास निमंत्रण पत्र पहुंच गए हैं। अब वे तो आएंगे ही। निमंत्रण पत्र करीब 15 से 20 दिन पूर्व से बांटे जा रहे है।