उन्होंने कहा कि न्यायालयों को भी इस प्रक्रिया में रुचि लेकर वादों के
अनावश्यक बोझ को कम करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने वादकारियों को
न्याय के वैकल्पिक माध्यमों पंचाट, लोक अदालत, मध्यस्थता, सुलह एवं परामर्श
के माध्यम से वादों के निपटारे पर जोर दिया।
संगोष्ठी में अपर जिला जज
कोर्ट संख्या तीन बंशराज ने कहा कि ऐसे विवाद जो पारिवारिक कलह या वैवाहिक
संबंधों से उत्पन्न हुए हों, उनका अधिक से अधिक निपटारा सुलह एवं
मध्यस्थता से करने का प्रयास किया जाना चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
के सचिव सिविल जज सीनियर डिवीजन एपी मिश्रा ने कहा कि सुलह समझौते के
माध्यम से मामले को निस्तारित कराए जाने से किसी पक्ष को द्वेश नहीं रहता
है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के द्वारा पात्र व्यक्तियों को निशुल्क
विधिक सहायता प्रदान की जाती है। स्पेशल जज एंटी डकैती डीसी सिंह ने भी
वादों के निपटारे में सुलह समझौते पर जोर दिया। इस दौरान अभिषेक पांडेय,
आलोक कुमार, जफीर अहमद आदि मौजूद रहे।