चकरनगर। आजादी बहुत संघर्षों के बाद मिली है। इसकी अहमियत हर किसी को समझनी चाहिए। यादों में ‘कमांडर’ परिचर्चा में समाजवादी चिंतक सुधींद्र भदौरिया ने यह बात कही।
बसरेहर के लोहिया खुर्द स्थित लाल सेना मुख्यालय में चल रहे चंबल फाउंडेशन के साहित्यिक, सांस्कृतिक समागम का रविवार को समापन हो गया। इसमें सुधींद्र ने कहा कि आजादी के आंदोलन में जितना उनके पिता कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया का योगदान रहा, उतना ही पूर्व सांसद और स्वतंत्रता सेनानी मां सरला भदौरिया का भी रहा। कार्यक्रम में ‘चंबल कल, आज और कल’ विषय पर भी चर्चा हुई। उन्होंने मंच पर ‘चंबल के महानायक-कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया’ पुस्तक परिवार प्रमुख डॉ. शाह आलम राना को दी।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजबहादुर सिंह यादव ने उनसे जुड़े कई संस्मरणों को याद किया। कहा कि जो संघर्ष बाबूजी ने किया, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नौजवानों पर है। विचारक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि लड़कियों को अवसर मिले तो वह समाज को आगे ले जाएंगी।
दिमनी (मुरैना) के विधायक रवींद्र सिंह तोमर ने कहा कि उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत यहीं की मिट्टी से हुई थी। इस मिट्टी में इतनी ताकत है, इतनी हनक है कि यहां की आवाज को कोई दबा नहीं सकता। बस जरूरत है तो आवाज उठाने की। उन्होंने क्षेत्र के विकास और कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की विरासत को आगे बढ़ाने के कार्यों में हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
लोक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुल्तान सिंह व चंबल परिवार के प्रमुख डॉ. शाह आलम राना ने भी विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता खादिम अब्बास ने की। संचालन चंद्रोदय सिंह चौहान ने किया। इस दौरान डॉ. धर्मेंद्र, कवि दीपक राज ने भी अपनी बात रखी। रमेश प्रजापति, वीरू भदौरिया, लाखन सिंह जाटव, प्रेम चंद्र बाथम, सर्वजीत भदौरिया, शिक्षक विनोद मास्टर, आदिल खान, चंद्रवीर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।