कागजों पर पौधरोपण का दो लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। वन विभाग ने 2000 पौधे निशुल्क उपलब्ध करवाए। इसके बाद भी एटा जनपद की नर्सरी से लाखों रुपये की खरीद दिखा दी गई। मामले का खुलासा होने के बाद ग्राम प्रधान ने मामले की शिकायत डीएम से करके दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ताखा में इसी वर्ष सभी ग्राम पंचायतों में व्यापक पैमाने पर पौधरोपण कराया गया। इसके लिए वन विभाग की नर्सरी ने प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए दो-दो हजार से अधिक पौधे निशुल्क दिए गए। हकीकत में जितने नि:शुल्क पौधे वन विभाग से मिले, उनका भी रोपण नहीं हो पाया।
ताखा में इसी बीच ब्लाक कर्मचारियों की मिलीभगत से कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा से पौधरोपण कर दिया गया। दो लाख रुपये का भुगतान जनपद से बाहर नर्सरी की फर्म को कर दिया गया। सरकारी पैसे को डकारने के लिए पंचायत में कागजों पर पौधों की कीमत दिखाकर भुगतान दिया गया लेकिन धरातल पर कोई पौधा लगाया ही नहीं गया।
शेखपुरा ग्राम पंचायत क ी ग्राम प्रधान जगतश्री एवं उनके पुत्र रजनीश यादव ने आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में मनरेगा से कागजों पर पौधरोपण कर लगभग दो लाख रुपये ब्लाक कर्मचारियों की मिलीभगत से निकाल लिए गए हैं।
इसकी शिकायत उन्होंने खंड विकास अधिकारी ताखा पीएन यादव से कर दी है। जिलाधिकारी को भी पत्र भेजकर पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर पूरे धन की रिकवरी कराने की मांग की
ताखा की ग्राम पंचायत शेखपुरा पचार में मनरेगा से पौधरोपण में सबसे पहले आठ से 12 फीट के पौधो के लिए 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया। प्लांटेशन के नाम पर 40 हजार का भुगतान किया गया। बाद में 91,590 रुपये का भुगतान भी पौधरोपण के लिए किया गया है।
इसमें दो वर्षीय पिंडी के 23 पौधों का भुगतान एक हजार की दर से, गोलमोहर जैसे छायादार 23 पौधो का भुगतान सात सौ रुपये की दर से, अशोक जैसे 45 पौधों का भुगतान तीन सौ की दर से और आठ से 12 फीट के 80 पौधों का भुगतान 211 रुपये की दर से किया गया है।
इतना ही नहीं दस गड्ढों में दो किलो गोबर की खाद के लिए भी 2211 रुपये की दर से 22,110 रुपये का भुगतान कर दिया गया। पंचायत में एक भी पौधा लगाया ही नहीं गया। पूरे भुगतान की डिटेल को मनरेगा की साइट पर भी डाला गया है ।
ग्राम पंचायत में सभी पौधों का भुगतान भी एमएस ग्रीन वर्ड नर्सरी को किया गया है। यह नर्सरी एटा जनपद की है। जब अपने यहां कम कीमत पर पौधे उपलब्ध हैं तो बाहर से पौधों की खरीद क्यों की गई? इस पर खंड विकास अधिकारी पीएन यादव ने बताया पूरे मामले की जांच की जा रही है। कार्यालय में बाबू के न आने से फाइल नही मिल रही है। पूरे मामले की जानकारी भी मुख्य विकास अधिकारी को दे दी गई है।