इटावा। जिले की 168 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां वर्ष 1995 के बाद से अभी तक एक बार भी अनुसूचित जाति का ग्राम प्रधान निर्वाचित नहीं हो सका है। आरक्षण का चक्र इधर उधर घूमता रहा परंतु इन पंचायतों तक नहीं पहुंच सका।
इसी तरह से कुछ सीटें जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत की भी हैैं जो आरक्षित नहीं हुईं। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने इस संबंध में पंचायत राज विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने अभी तक अनुसूचित जाति के आरक्षण से वंचित ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख पद पर आरक्षण करने की मांग की है।
उप्र में पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत 1995 से पंचायत चुनावों में आरक्षण लागू हुआ था। जिसमें 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए तथा 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। कुल 471 ग्राम सभाओं में से 168 ऐसी ग्राम सभाएं हैं जहां 1995 से अब तक अनुसूचित जाति का एक भी प्रधान नहीं है।
यहां-यहां नहीं छुआ आरक्षण
ब्लॉक बढ़पुरा की 61 में से 18 ग्राम पंचायत, ब्लॉक चकरनगर की 41 में से 4 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक सैफई की 45 में से 26, ब्लॉक ताखा की 42 में से 15 ग्राम पंचायतं, ब्लॉक बसरेहर की 67 में से 27 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक जसवंतनगर की 61 में से 24 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक भरथना की 63 में से 24 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक महेवा की 91 में से 30 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां अनुसूचित जाति का प्रधान नहीं बना। पूर्व अध्यक्ष उदयभान सिंह ने पंचायत चुनाव आरक्षण से वंचित अनु जाति को न्याय दिलाने की मांग की है। जिससे पंचायत राज अधिनियम का जो उद्देश्य था उसका अनुपालन हो सके।