02::जानकारी देते आयुष चिकित्सक डॉ. कमल कुमार कुशवाहा। स्रोत-स्वयं
- आयुष विभाग के चिकित्सक डॉ. कमल कुमार कुशवाहा ने दिए सुझाव
- आम का पना भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। इन दिनों भीषण गर्मी और नौतपा का प्रकोप जारी है। आसमान से बरसती आग और लू के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में डिहाईड्रेशन, उल्टी-दस्त, चक्कर आने और कमजोरी के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
तपती गर्मी के इस दौर में आयुष विभाग के चिकित्सक डॉ. कमल कुमार कुशवाहा ने क्षेत्रवासियों को आयुर्वेद के पारंपरिक तौर-तरीके अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नौतपा के घातक असर से बचने के लिए हमारे घरों में मौजूद पारंपरिक पेय किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। उन्होंने लू और पेट की बीमारियों से बचने के लिए चार देशी उपाय बताए है।
बताया कि दाल और सब्जियों में कच्ची अमिया (कच्चा आम) डालकर खाएं। यह शरीर को अंदरूनी ठंडक देती है और लू के थपेड़ों से बचाती है। सत्तू में काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर पीएं। यह पसीने से होने वाली कमजोरी को तुरंत दूर करता है और शरीर को ऊर्जा देता है।
धूप में निकलने से पहले आम का पना जरूर लें। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है। पेट की गर्मी, कब्ज और सीने की जलन को शांत करने के लिए बेल का शरबत इस मौसम का सबसे अच्छा फल है।
उन्होंने अपील की है कि इस मौसम में तली-भुनी चीजों और बाजारू कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी तरह दूरी बना लें। इसकी जगह घर की बनी छाछ, नींबू पानी और मौसमी फलों का सेवन करें। कहा कि आयुर्वेद सिर्फ इलाज नहीं बल्कि सही जीवनशैली है, जिसे अपनाकर हम नौतपा की इस जंग को आसानी से जीत सकते हैं।