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बाल रोग विभाग में लौटी ‘संजीवनी’

Sat, 20 Aug 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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हस्‍तरेखा च‌िक‌ित्‍सक
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जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए अब लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। यहां पूर्व सीएमओ डा मंजू शर्मा ने बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. बीएस अग्निहोत्री भी छुट्टी से वापस आ गए हैं। डा. भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विभाग को दो माह पूर्व ग्रहण लग गया था। बाल रोग विशेषज्ञ डा. बीएस अगिभनहोत्री दो माह की छुट्टी लेकर विदेश यात्रा पर चले गए थे। वहीं डा. आरके चौरसिया दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। तीसरे डाक्टर मनोज श्रीवास्तव का स्थानांतरण हो गया।
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तीनों बाल रोग विशेषज्ञों के एक साथ अस्पताल से चले जाने से यहां इलाज के लिए आने वाले बच्चों के सामने समस्या खड़ी हो गई। बच्चों के इलाज के लिए लोगों को लंबी दौड़ लगानी पड़ रही थी। अस्पताल के फिजीशियन डा साहू ही बच्चों का भी इलाज कर रहे थे। जिससे फिजीशियन कक्ष में ओपीडी दो सौ से बढ़कर साढे़ तीन सौ मरीजों तक पहुंच गई थी। अब एक साथ दो बाल रोग विशेषज्ञों के ज्वाइन कर लेने से अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। जहां पूर्व सीएमएस डा बीएस अगिभनहोत्री और पूर्व सीएमओ मंजू शर्मा के कार्यभार संभालने के बाद अस्पताल के बाल रोग विभाग की व्यवस्था दुरुस्त हो गई है।

हड्डी रोग विशेषज्ञ भी आए
इटावा। अस्पताल में हड्डी रोग विभाग में कुल तीन डाक्टर सेवा में थे। जिनमें डा राजकुमार, डा. विष्णु मेहरोत्रा और डा. अभिषेक श्रीवास्तव शामिल रहे। इनमें से डा. राजकुमार के सैफई मिनी पीजीआई में ज्वाइन कर लेने के बाद थोड़ी परेशानी बढ़ गई थी। बचे दो में से एक डाक्टर के आपरेशन पर जाने के बाद समस्या और गहरा जाती। अब इस खंड में भी दो नए डाक्टरों ने ज्वाइनिंग कर ली है। जिसमें हड्डी रोग विशेषज्ञ डा आलोक गुप्ता पूर्व में ही कार्यभार संभाल चुके हैं और डा अनुराग दुबे ने हाल ही में ज्वाइनिंग लेकर मरीज देखना शुरू कर दिया है। डॉक्टर  साकेत वर्मा ने भी जिला अस्पताल में सामान्य ड्यूटी मेडिकल आफीसर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।
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तीन डाक्टरों के आने से दूर र्हुइं दिक्कतें: सीएमएस
इटावा। जिला संयुक्त चिकित्सालय क ी पुरुष विंग के सीएमएस डा एके पालीवाल ने कहा कि अस्पताल में तीन डाक्टरों के और आने से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुईं हैं। दो माह तक बाल रोग विशेषज्ञ न होने से काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। अस्पताल में आने वाले मरीजों में हड्डी रोगियों की संख्या काफी अधिक है। इस क्षेत्र में दो डाक्टरों के आने से मरीजों को सरलता से उपचार मिल सकेगा।
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