गार्ड हरिशंकर शुक्ला से घटना की जानकारी लेेती जीआरपी।
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आनंद विहार (दिल्ली) से भुवनेश्वर जा रही उड़ीसा संपर्क क्रांति (12820 डाउन) की जनरल बोगी में चढ़े छह बदमाशों ने चेकिंग के बहाने यात्रियों से मारपीट कर उनसे करीब 50 हजार रुपये लूट लिए। जब इटावा स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो चालक, गार्ड और टीटीई को घटना के पांच घंटे बाद भी ट्रेन में डकैती होने की जानकारी नहीं थी। जनरल बोगी अन्य बोगी से इंटरकनेक्ट नहीं थी, जिससे नान स्टाप ट्रेन के यात्री किसी को घटना की जानकारी नहीं दे सके। खास बात यह कि लूट का शिकार हुई संपर्क क्रांति में कोई पुलिस स्कॉर्ट भी तैनात नहीं था।
शुक्रवार को दोपहर में उड़ीसा संपर्क क्रांति जब इटावा स्टेशन पर रोकी गई और ट्रेन के गार्ड हरिशंकर शुक्ला से डकैती की घटना के बारे में पूछा गया तो वह कुछ भी नहीं बता सके और घटना से इंकार करने लगे। जबकि जिस जनरल बोगी में बदमाशों ने डकैती की घटना को अंजाम दिया था वह गार्ड बोगी के ठीक आगे वाली थी। जीआरपी एसआई दीपक सिंह व आरपीएफ प्रभारी डीबी सिंह ने बोगी में जाकर पूछताछ की तो यात्रियों ने बताया कि जब बदमाश लूटपाट के बाद ट्रेन से उतर गए तो वह चाहते हुए भी इसकी जानकारी किसी को नहीं दे सके। काफी समय बाद उन्होंने मोबाइल से रेलवे का हेल्पलाइन नंबर खोजा और घटना की जानकारी रेलवे को दी। इसके बाद कंट्रोल ने ट्रेन में लूट का मैसेज पास करते हुए इटावा स्टेशन पर नान स्टाप संपर्क क्रांति को रोककर घटना की जानकारी लेने के निर्देश जीआरपी और आरपीएफ क ो दिए। वहीं जांच में पाया गया कि ट्रेन में आरपीएफ या जीआरपी का कोई स्कॉर्ट भी मौजूद नहीं था। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों के चुनाव ड्यूटी में जाने से होली के समय भी ट्रेनें बिना स्कॉर्ट के चल रही हैं जबकि हमेशा ही होली के समय ट्रेनों और स्टेशनों पर रेलवे सतर्कता बढ़ाती है।
होली पर घर जा रहे थे लूट का शिकार हुए यात्री
इटावा। ट्रेन की जनरल बोगी में सवार ज्यादातर यात्री दिल्ली में मजदूरी या नौकरी करते हैं। वह छुट्टी लेकर होली मनाने के लिए घर जा रहे थे। लूट का शिकार हुआ हरि बहेरिया सोनीपत में प्लंबर का कार्य करता है जबकि चेतन मालदेव नगर दिल्ली में एक फैक्ट्री में मजदूरी करता है वह पत्नी मिताली के साथ घर जा रहा था। भद्रव उड़ीसा निवासी प्रमोद व देव्रत निवासी पश्चिम बंगाल भी दिल्ली की प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते है। जबकि बीरेंद्र दिल्ली की एक प्लाईवुड कंपनी में व दयानंद प्राइवेट कंपनी में मजदूरी करते हैं।
स्पोर्ट्स शू पहने सभी बदमाश युवा थे
इटावा। लूट का शिकार हुए यात्रियों का कहना था कि घटना को अंजाम देने वाले सभी बदमाश लगभग 30 वर्ष की आयु के थेे और सभी स्पोर्ट्स शू पहने हुए थे। उनकी बोल चाल की भाषा रेल कर्मचारियों की ही तरह थी। जहां कुछ बदमाश हाथ में लोहे की राड और लकड़ी के रूल लिए हुए थे तो कुछ के हाथ में ब्लेड थे। बदमाशों ने बोगी में आकर सबसे पहले खुद को रेलवे स्टाफ बताते हुए चेकिंग की और इसके बाद मारपीट शुरू कर दी।
यात्रियों को बिना पेंट शर्ट के ही सीट पर भेजा
इटावा। बदमाशों ने ट्रेन में लगभग एक दर्जन यात्रियों को लूट का शिकार बनाया जिसमें से कुछ यात्रियों को टायलेट में ले जाकर उनके पेंट शर्ट उतार कर चेकिंग की और जेब में रखे पैसों को लेने के साथ ही उनके कपड़े भी वापस नहीं दिए। यात्रियों को बिना पेंट शर्ट के ही वापस अपनी सीट पर भेज दिया। लूट का शिकार देवव्रत ने बताया कि जब उसने बदमाशों से कपड़े मांगे तो उन्होंने उसे पीटा और बिना कपड़े के ही सीट पर जाने को कहा। डर से वह अपनी सीट पर जा बैठा।