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पारिवारिक लड़ाई पर चुप्पी साध गए सपाई

Wed, 14 Sep 2016 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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सिविल लाइन कालोनी स्थित सपा कार्यालय। - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के बीच चल रही सियासी जंग ने पार्टी को हिला कर रख दिया है। कार्यकर्ता आहत हैं, वहीं पदाधिकारियों की परेशानी ये है कि किसके पक्ष में बोले और किसका विरोध करें। बुधवार को पार्टी कार्यालय और जिला पंचायत अध्यक्ष के सरकारी आवास पर इसका सीधा असर दिखा। यहां सन्नाटा पसरा रहा। कार्यकर्ता मोबाइल पर सियासी हलचल पर नजरें गड़ाए रहे। उन्हाेंने मामले में चुप्पी साधना ही बेहतर समझा।
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पार्टी कार्यालय: दोपहर 12 बजे
बुधवार सुबह तक कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव से लोक निर्माण और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी वापस लेने की खबर सभी सपाइयों को मिल गई। कार्यकर्ता, नेता और पदाधिकारी शिवपाल के दिल्ली रवाना होने तक वहीं डटे रहे। अमर उजाला टीम पार्टी कार्यालय का माहौल देखने पहुंची तो वहां गिनती की चार बाइकें खड़ी मिलीं। कुछ युवा कार्यकर्ता और महिला प्रकोष्ठ की पूर्व पदाधिकारी सरिता सिंह, सुषमा भदौरिया व पूर्व सभासद रामबेटी गोयल मौजूद थीं। हाई लेवल के विवाद पर कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं हुआ। सबका रटा रटाया सा जवाब मिला, कि वह तो पार्टी के साथ हैं। जो भी हल निकलेगा, उसी को मानेंगे। हालांकि महिला पदाधिकारियों में यह उत्सुकता अवश्य रही कि आगे क्या होने वाला है। बताया गया कि सुबह पार्टी के जिला महासचिव कृष्ण मुरारी गुप्ता कुछ देर के लिए आए थे, कोई अन्य पदाधिकारी नहीं आया।

जिला पंचायत अध्यक्ष आवास : दोपहर एक बजे
टीम ने एसएसपी चौराहा स्थित जिला पंचायत अध्यक्ष के सरकारी आवास का रुख किया। वहां भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पार्टी के सेक्टर प्रभारी सुरेश यादव और कार्यकर्ता मोहम्मद मुस्तकीम राइन मोबाइल पर न्यूज देखते मिले। कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे, लेकिन सभी शांत बैठे थे। मानो कहने और सुनने को कोई विषय न हो। यहां पता चला कि जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव दिल्ली गए हैं। कार्यकर्ताओं को देखकर लग रहा था कि वह इस विवाद से खुश नहीं हैं। हालांकि सभी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के फैसले पर विश्वास जताते नजर आए। चुनाव से चंद महीने पूर्व इस तरह के विवाद उठने से नफा कम और नुकसान अधिक होगा। कार्यकर्ताओं के मन में शायद यही बात चल रही है।
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