इटावा सफारी पार्क में मृग सफारी में 10 काले हिरन लाने के बाद अब तेंदुआ लाने की तैयारी है। वहीं भालू सफारी को गुलजार करने में अभी भी सफारी प्रशासन को सीजेडए (सेंट्रल जू अथॉरिटी) की अनुमति का इंतजार है। इसके बाद ही सफारी प्रशासन रांची और उड़ीसा के नंदनकाना से सफारी में भालू ला सकेगा। इटावा सफारी पार्क के लायन सफारी और हिरन सफारी में जानवरों को लाए जाने के बाद हाल ही में मृग सफारी में 10 काले हिरनों को लाया गया है।
अब सफारी पार्क तेंदुआ और भालू सफारी को आबाद करने की तैयारी में है। 17 फरवरी को सीजेडए ने सफारी प्रशासन को जो अनुमति पत्र सौंपा उसमें सिर्फ मृग और तेंदुआ लाने की ही अनुमति दी थी। जबकि सफारी प्रशासन ने भालू लाने की अनुमति भी सीजेडए से मांगी थी। फिलहाल भालुओं को सफारी लाने का मामला अधर में लटका है। फिर भी सफारी प्रशासन भालुओं को लाने के प्रयास करने लगा है। इसके लिए रांची और नंदनकाना उड़ीसा से संपर्क साधा जा रहा है। यही नहीं रांची और उड़ीसा को भालुओं के बदले लखनऊ चिड़ियाघर से हिरन देने का खाका भी तैयार कर लिया है।
मार्च में पहुंचेंगे आठ तेंदुए
इटावा। इटावा सफारी पार्क में 10 और काले हिरन लाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही कानपुर और लखनऊ से आठ तेंदुओं को भी मार्च में सफारी में पहुंचा दिया जाएगा। इनमें से पांच तेंदुए कानपुर व तीन तेंदुओं को लखनऊ चिड़ियाघर से लाने की तैयारी है।
शेड्यूल-1 के जानवरों की श्रेणी में है भालू
इटावा। सीजेडए ने विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को अलग-अलग शेड्यूल में रखा है। बबर शेर, तेंदुआ, चीता, भालू, काले मृग के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण जानवरों को शेड्यूल -1 में रखा गया है। वहीं हिरन को शेड्यूल -2 में रखा गया है। शेडयूल-1 के जानवर सीजेडए की विशेष देखरेख में रहते हैं। इन जानवरों की संख्या भी सीजेडए के लिखित दर्ज होती है। यही नहीं शेडयूल-1 के जानवरों की देखरेख कहां और कौन कर रहा है, जानवर जंगली क्षेत्र में रह रहे हैं इसका लेखाजोखा भी सीजेडए के पास रहता है। इन जानवरों को बिना सीजेडए की अनुमति के इधर से उधर नहीं किया जा सकता।