पूर्व चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू की पत्नी ज्योति गुप्ता
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इटावा। नगर पालिका परिषद इटावा की सीट महिला के लिए आरक्षित होने के साथ ही पूर्व चेयरमैन के परिवार की महिलाएं चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। इसके लिए इन महिलाओं ने अपने-अपने दलों में अपने को टिकट की दौड़ में शामिल कर लिया है। इस समय पूर्व चेयरमैनों का एक ही लक्ष्य बना हुआ है कि किसी तरह पत्नी या पुत्रवधु को अपने दल से चेयरमैनी का टिकट दिलवा दें। इसके लिए उन्होंने पार्टी में अपने उच्च स्तरीय नेताओं के जरिए सिफारिश लगाना शुरू कर दिया है।
सभासदों की आरक्षण सूची जारी होने के बाद प्रदेश स्तर से चेयरमैनों की आरक्षण सूची भी जारी हो गई है। इस बार इटावा नगर पालिका परिषद से चेयरमैन रह चुके, कई पूर्व चेयरमैन दोबारा चुनावी मैदान में उतरने का सपना संजोए थे। इंतजार था तो सिर्फ आरक्षण सूची जारी होने का। जैसे ही आरक्षण सूची जारी हुई और नगर पालिका परिषद इटावा महिला के लिए आरक्षित कर दी गई तो चेयरमैन बनने का सपना संजोए पूर्व चेयरमैनों का सपना टूटा जरूर लेकिन वह निराश नहीं हुए क्योंकि महिला के लिए सीट आरक्षित होने पर उन्होंने अपने परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारने का मन बना लिया।
नगर पालिका परिषद के निवर्तमान चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू विगत निकाय चुनाव में सपा प्रत्याशी नफीसुल हसन अंसारी को पराजित कर चेयरमैन बने थे। हालांकि बाद में सपा के चेयरमैन के रूप में पांच वर्ष तक अपना कार्यकाल पूरा किया। वह इस बार भी चुनाव मैदान में उतरने को तैयार थे लेकिन महिला सीट होने पर उन्होंने पत्नी ज्योति गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारने का मन बना लिया। ज्योति गुप्ता भी विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी हैं। इसके अलावा वर्ष 2007 से 2012 तक सपा के चेयरमैन रहे फुरकान अहमद ने भी पत्नी नौशाबा फुरकान को चुनाव मैदान में उतारने का मन बनाया है।
नौशाबा फुरकान एक दशक से जायंट्स ग्रुप के जरिए समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। यह दोनों वर्तमान में समाजवादी पार्टी में ही हैं। वहीं भाजपा की ओर से एकमात्र चेयरमैन रहे जसवंत सिंह वर्मा ने पुत्रवधू पूजा वर्मा को चुनावी मैदान में उतारने के लिए भाजपा से टिकट की दौड़ में शामिल कर लिया है। पूजा उनके पुत्र अवनीश वर्मा की पत्नी हैं। अवनीश स्वयं भी आरएसएस में जिला प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अभी इन पूर्व चेयरमैनों के लिए चुनौती अपने दल से अपनी पत्नी अथवा पुत्रवधू को टिकट दिलाना है। महिला सीट होने के कारण राजनैतिक दलों की ओर से चेयरमैन का चुनाव लड़ने के लिए दावेदारों की कतार काफी लंबी हो चली है। लिहाजा इस कतार में पत्नी या पुत्रवधू को नंबर वन पर लाना काफी कठिन हो गया है। इसलिए उन्होंने इसक े लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।