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Etawah News: नदियां हो रहीं विकराल, बाढ़ की विभीषिका से सहमे ग्रामीण

Thu, 13 Jul 2023 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 18:::::मड़ैया पछायगांव का प्राथमिक विद्यालय हो जाता है जलमग्न। संवाद
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फोटो 19::::::मड़ैया पछायगांव को जाने वाली कटी सड़क। संवाद

फोटो 20:::::पिछले साल आई बाढ़ से धंसी मकान की दीवार। संवाद




कटा रास्ता...ढहे मकान याद दिलाते बाढ़ की विभीषिका











- बढ़पुरा क्षेत्र के तीन गांव चंबल का जलस्तर बढ़ने से हर साल डूबते

- कोई टीले पर बैठकर बिताता हैं रातें तो कोई रिश्तेदार के यहां लेता है पनाह

संवाद न्यूज एजेंसी

इटावा/उदी। कटा रास्ता...ढहे घर बढ़पुरा क्षेत्र के तीन गांवों के लोगों को बाढ़ की विभीषिका की याद दिलाकर उनका दिल कंपा देते हैं। हर साल चंबल नदी का जलस्तर बढ़ते ही बढ़पुरा मड़ैया, मड़ैया पछायगांव और बसवारा जलमग्न हो जाते हैं। ग्रामीणों को कई-कई दिन अपने घरों से दूर टीलों और अपने रिश्तेदारों को दिन बिताने पड़ते हैं। बैराजों से पानी छोड़ने के बाद चंबल का जलस्तर बढ़ने का अंदेशा हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों को फिर अपना आशियाना छोड़ने की चिंता सताने लगी है। उधर यमुना नदीं में भी हरियाणा के हथिनीकुंड बांध से यमुना नदी में छोड़े गए पानी को चार दिन हो गए हैं।









बढपुरा के बीहड़ में बसे तीनों गांवों के लोग कई दशकों के बाद भी बाढ़ का लगभग हर साल दंश झेलते हैं। बढ़पुरा मड़ैया गांव की चंबल से दूरी मात्र 500 मीटर ही है। ऐसे में नदी का चेतावनी प्वाइंट लगभग 121 पार करते ही गांव में पानी घुसने लगता है। सड़कें जलमग्न होने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसके बाद पानी गांव के लगभग 25 घरों में घुसकर लोगों की जिंदगी मुहाल कर देते हैं।
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जीवन बचाने के लिए लोग हर साल अपनी गृहस्थियां छोड़कर ऊंचे टीलों पर छप्पर तानकर रहने लगते हैं। वहीं ऐसा ही कुछ नजारा बसवारा और मड़ैया पछायगांव का भी होता है। बसवारा गांव की आबादी लगभग 12 सौ है। गांव लगभग नदी से डेढ़ किलोमीटर दूर होने की वजह से चेतावनी निशान पार करते ही खतरे के निशान पर पहुंचते ही गांव में पानी घुस जाता है। ऐसे में लोगों के सपनों के मकान दरक जाते हैं। घरों में गल्ला समेत अन्य गृहस्थी पानी के साथ हर साल बह जाती है।
मडैया पछांयगाव की आबादी करीब एक हजार की है। इस गांव की दूरी नदी से लगभग दो किलोमीटर है। यहां भी यही हालात होते हैं। पिछले वर्ष गांव के सभी घर पानी मे डूब गए थे। इसमें कई लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। कई सैकड़ों बीघा बाजरे की फसल बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई थी। गांव के सरकारी स्कूल पूरी तरह डूब गया था। इससे बिजली आपूर्ति भी काट दी गई थी। लोग अपनी गृहस्थियां छोड़कर छोड़कर रिश्तेदारों और सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए थे।
गांव का परिषदीय स्कूल भी जलमग्न होने से करीब एक माह तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रहती है। फिर अगले सप्ताह तक गंगा बैराज से पानी छूटने के बाद ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। उनका कहना है कि गांव का कहीं ऊंचाई पर बसाने का भी आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक साल भी इस पर कोई काम नहीं हो सका।

फोटो 21::::हाकिम सिंह। संवाद

बाजरे की फसू हुई थी बर्बाद, घर धसकने से हुआ था नुकसान::::

ग्राम मडै़या पछांयगाव के हाकिम सिंह ने पिछले वर्ष में आई बाढ़ का को याद करते हुए दुखी हो गए। बताया कि खतरे के निशान के बाद चंबल नदी के पानी से पूरा गांव डूब गया था। उस दौरान बहुत पडी परेशानी हो रही थी। यह समझ मे नहीं आ रहा था कि अपने परिवार को लेकर कहा जाएं कि प्रशासन ने भी कोई मद्द नहीं की थी। बाढ़ के जाने के बाद हमारा घर जमीन में धसक गया। इसका एक लाख रुपये से ऊपर का नुकसान हो गया है। हमारे 30 बीघा बाजरे फसल पानी मे बर्बाद हो गई। इसका मुआवजा नहीं मिला। अब फिर बाढ़ का डर सता रहा है।



फोटो 22::::वेदराम। संवाद

भूखे पेट जागकर रातें काट देते थे::::

गांव के बेदराम ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से चंबल नदी की बाढ के पानी से हमारा घर बराबर डूब जाता है। पिछले वर्ष घर डूबने के बाद हम अपने बाल बच्चों के बाद बीहड़ के ऊचें टीले पर रहकर गुजारा किया था। उस दौरान बारिश भी हो रही थी। अस्थाई ठिकाने पर कभी-कभी पूरी-पूरी रात भूखे पेट ही काट देते थे। कई दिन तक गांव में पानी भरा रहने की वजह से मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया था। मेरी बाजरे की फसल डूब गई थी। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने दावे तो कई किए थे, लेकिन मद्द आज तक नहीं मिल सकी।





एसडीएम विक्रम राघव ने बताया कि बाढ़ को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। बाढ़ चौकियों में ग्रामीणों के रहने का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही इस बार नाव और नाविकों के लिए भी विशेष इंतजाम है। आवास योजना के लिए सर्वे कराया है। जल्द ही लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

हथिनीकुंड बांध से छोड़ा गया पानी, यमुना हो रही विकराल

फोटो 03::::बकेवर क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर। संवाद



- हथिनीकुंड से छोड़ा गया पानी मथुरा गोकुल बैराज और आगरा के पोइया घाट तक पहुंच गया

संवाद न्यूज एजेंसी

बकेवर। यमुना का जलस्तर तेज से बढ़ रहा है। जिले की सीमा में नदी का 36 घंटे में 30 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ गया है। अभी हथिनीकुंड बांध से छोड़ा गया। पानी मथुरा के गोकुल बैराज व आगरा के पोइया घाट तक पानी पहुंच गया है। मथुरा में यमुना में 10 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ रहा है।

अच्छी बारिश होने व कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति से व हथिनीकुंड से यमुना नदी में पानी छोड़े जाने से इटावा जनपद के बकेवर लवेदी क्षेत्र के किनारे बसे गांव के लोगों में जलस्तर बढ़ने की आशंका से काफी डर का माहौल बना हुआ है। किनारों के गांवों के ग्रामीण भी केंद्रीय जल आयोग के विभाग के आधिकरियों के साथ-साथ यमुना नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए।

यमुना नदी के जलस्तर में वृद्धि होने लगी कई निचले इलाकों में थोड़ा बहुत जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे पर जलभराव की स्थिति होने लगी है। सोमवार को यमुना नदी का जलस्तर शाम को तीन बजे 160.92 मीटर पर था वहीं बुधवार को सुबह यह जलस्तर 117. 12 पर पहुंच गया। हर घंटे लगभग एक सेंटीमीटर की वृद्धि हो रही है। पिछले 36 घंटे में यमुना नदी का लगभग 30 सेंटीमीटर पानी का जलस्तर बढ़ा हुआ है।

हरियाणा के हथिनीकुंड बांध से यमुना नदी में छोड़े गए पानी को चार दिन हो गए हैं। राहत की बात यह है कि पानी अभी तक यहां नहीं पहुंचा है। नदी के किनारे बसे गांवों मड़ैया, कछपुरा, दिलीप नगर, पठा, मड़ैया मल्हान, मड़ैया अन्दावा आदि एक दर्जन गांव के लोगों में जल स्तर बढ़ने को लेकर संशय बना हुआ है।
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कोट

केंद्रीय जल आयोग के आगरा डिवीजन के कनिष्ठ अभियंता विष्णु ने बताया कि हथनीकुंड से यमुना नदी में छोड़ा गया। पानी मथुरा के गोकुल बैराज तक पहुंच गया है। मथुरा में प्रति घंटे 10-12 सेमी. की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है। आगरा के पोइया घाट तक भी पानी पहुंचने लगा है। जिले में पानी पहुंचने में दो से ढाई दिन का समय लग सकता है। नजर बनाए हुए हैं।
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