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फिलहाल तो ट्रामा सेंटर में दुश्वारियां ही हैं

Sun, 10 Apr 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
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गंदगी के बीच उपचार - फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में शुरू ट्रामा सेंटर मरीज व डॉक्टर दोनों की जान सांसत में डाले है। अस्पताल प्रशासन इस उधेड़बुन में फंसा है कि किस प्रकार से ट्रामा सेंटर व वार्ड में मौजूद मरीजों के लिए 24 घंटे डॉक्टर उपलब्ध कराया जाए। शनिवार को पहले दिन तमाम अव्यवस्थाओं के बीच ट्रामा सेंटर में मरीजों का इलाज तो  शुरू किया गया, पर मरीज व उनके तीमारदारों को दिक्कत झेलनी पड़ी।
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चार बेड पर मरीज को उपचार के बाद सिफ्ट भी किया गया। उपचार के बाद दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को एक्सरे के लिए तेज धूप में पूरे जिला अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ी तो वहीं तीमारदारों को सड़क पर स्टेचर घसीटकर पसीना बहाना पड़ा।

वहीं ट्रामा सेंटर के बेड़ फु ल होने पर कुछ मरीज स्टेचर पर ही पड़े रहे, उन्हें बाद में जिला अस्पताल के वार्ड में सिफ्ट कराया गया। उधर, अचानक ही इमरजेंसी में ताला लटक जाने से भी अस्पताल में अव्यवस्था दिखाई दी और एंबुलेंस से पहुंच रहे मरीजों के तीमारदारों क ो इधर से उधर भटकता देखा गया।
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ट्रामा सेंटर में मरीजों को एक्स-रे रूम में वार्ड बनाकर रखा गया है। इस वार्ड से कनेक्ट डार्क रूम में गंदगी की भरमर है। डार्क रूम की दीवारें गुटखा तंबाकू की पीक से लाल हैं।इस गंदगी के बीच गंभीर रूप से घायल और बीमार कितने सुरक्षित हैं इसकी फिक्र किसी को नहीं है।

जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के पहुंच जाने से अस्पताल प्रशासन के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। इमरजेंसी मेडिकल आफीसर ट्रामा सेंटर में आने वाले गंभीर मरीजों का उपचार करें या कि वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने 300 मीटर का चक्कर लगाकर वार्ड में पहुंचे।

कहने को तो जिला अस्पताल में ट्रामा शुरू कर दिया गया है लेकिन अस्पताल प्रशासन भी इसे अभी इमरजेंसी ही मान रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के मुख्य गेट से ट्रामा सेंटर के बीच मरीजों की जानकारी के लिए जो संकेतक बोर्ड लगाए हैं उनमें भी यही लिखा गया है कि इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में है।
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