ऊसराहार। कोरोना संक्रमित मरीज से 70 हजार रुपये मांगने वाले एंबुलेंस चालक के खिलाफ सैफई थाने में गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई है। कस्बा ऊसराहार निवासी आलू व्यापारी राजीव कुमार उर्फ उपनीश गुप्ता को मैनपुरी से कानपुर ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने 70 हजार रुपये किराया मांगा था। किराये को लेकर राजीव के तीमारदारों व एंबुलेंस चालक के बीच तकरार चलती रही। इसी दौरान राजीव की मौत हो गई थी। आलू व्यापारी के भाई विवेक गुप्ता की तहरीर पर सैफई थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
विवेक ने बताया कि उसके भाई राजीव की 29 अप्रैल को तबीयत खराब हो गई थी। इस पर भाई को मैनपुरी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। 9 मई को हालत बिगड़ने पर कानपुर ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक से फोन पर 15 हजार रुपये में बात हुई थी। जब वह और उसके चाचा नरेंद्र गुप्ता सैफई अस्पताल के गेट संख्या 3 पर पहुंचे, तो एंबुलेंस संख्या यूपी 75 बीटी 1788 वहीं खड़ी थी। संचालक को आसपास के लोग कक्का कहकर बुला रहे थे। वहां से वे लोग मरीज को लेकर कानपुर के लिए चले। आरोप है कि रास्ते में सैफई के पास एंबुलेंस चालक ने उनसे 70 हजार रुपये की मांग की।
वह 40 हजार देने को राजी भी हो गए थे, लेकिन वह 70 हजार रुपये पर अड़ा रहा। इसकी सूचना जब उसने सैफई थाने में दी। मौके पर पुलिस पहुंची, तो चालक एंबुलेंस लेकर भाग गया। आरोप है कि इस मामले में सैफई पुलिस ने तमाम मिन्नतों के बाद भी कोई मदद नहीं की, जिससे उसके भाई की मौत हो गई। थाना प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने बताया कि एंबुलेंस चालक पर गैर इरादन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। जल्द ही चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ऊसराहार। आलू व्यापारी की मौत के मामले में सोशल मीडिया पर मृतक परिवार को न्याय दिलाने की मांग ने जोर पकड़ा तो शासन भी गंभीर हुआ। मैनपुरी के डीएम ने राजीव के भाई विवेक को फोन कर मदद का भरोसा दिलाया। साथ ही रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए इटावा के प्रशासनिक अफसरों से बात भी की। इधर, पीड़ित परिवार से मिलने जिले का कोई अधिकारी अथवा नेता नहीं पहुंचा। इससे परिवार में नाराजगी है।
इटावा। आलू व्यापारी की मैनपुरी के जिला अस्पताल में हुईं मौत के मामले में मैनपुरी के डीएम महेंद्र बहादुर सिंह पहल नहीं करते, तो एंबुलेंस चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं होती। वजह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद इटावा के एसएसपी डॉ.बृजेश कुमार सिंह ने सैफई थाना प्रभारी को जांच सौेंपी। थाना प्रभारी ने चंद घंटों में जांच पूरी करके आरोपी एंबुलेंस चालक को क्लीन चिट दी थी। अफसरों ने थाना प्रभारी की जांच रिपोर्ट पर यकीन कर लिया। पुलिस अथवा प्रशासनिक विभाग के किसी आला अफसर से जांच कराना जरूरी नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि मैनपुरी के डीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद आरोपी एंबुलेंस चालक को क्लीन चिट देने वाले सैफई थाना प्रभारी ने अपने ही थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।