अचानक शुरू हुई बारिश ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। बारिश से आलू की फसल बर्बाद होने का डर है। हाड़तोड़ मेहनत पर पानी फिरता देख किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। हालांकि अभी खुदाई कार्य प्रभावित हुआ है लेकिन बारिश का यह सिलसिला जारी रहा तो आलू सड़ने की स्थिति में भी पहुंच सकता है।
सरसों, अरहर, मटर और चना की फसलों को भी बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं से नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल को इस बारिश से नुकसान भी है, तो कहीं फायदा भी हो रहा है।
शनिवार की रात से मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। कभी तेज तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला रविवार को दिन भर जारी रहा। यह बारिश किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। विशेषकर आलू की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
जिले में इस बार आलू की अच्छी पैदावार होने की संभावना है। गत वर्ष पानी बरसते रहने से आलू को नुकसान हुआ था। किसान इस बात से चिंतित हैं कि इस बार भी आसमानी पानी उनकी मेहनत पर पानी न फेर दे।
जिले में इस बार आलू का आच्छादन करीब 17 हजार हेक्टेयर में हुआ है। करीब सवा चार लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होने का अनुमान है। इन दिनाें किसान आलू की खुदाई में जुटे थे। किसानों की मानें तो अभी महज 10 फीसदी खुदाई संभव हो पाई थी।
यानी ज्यादातर आलू खेतों में है। फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है। लेकिन अचानक मौसम ने उनके काम में अड़ंगा डाल दिया। बारिश से खुदाई कार्य करीब 8-10 दिन लेट हो जाएगा। वह भी तब जब बरसात थम जाए और धूप निकल आए। किसानों को चिंता इस बात की भी है कि बरसात कुछ दिन और जारी रही तो आलू सड़ भी सकता है। क्योंकि खेत की कुली (पौध से पौध के बीच की नाली) में पानी भर गया है। जो न सूखा तो नुकसान होना तय है।
आलू ही नहीं सरसों, अरहर, मटर, चना की फसलें भी इस बारिश के साथ चल रही तेज हवा से प्रभावित हुई हैं। इनके पौधे जमीन पर बिछ गए हैं। जिससे उनके फूल झड़कर मिट्टी में मिल गए। गेहूं की फसल के लिए यह बारिश नुकसान और लाभ दोनों लेेकर आई है।
जहां इस फसल में बाली निकल चुकी है, वहां नुकसान हुआ है और जहां बालियां नहीं आई हैं। वहां फसल को पानी मिल गया। कुल मिलाकर फसल की दृष्टि से यह बारिश नुकसानदेह साबित हो रही है।