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मूर्तियों के संरक्षण के साथ ही इलाके में होगी खुदाई

Tue, 05 Apr 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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ईश्वरीपुरा गांव में मूर्तियों को देखने के बाद आपस में चर्चा करते पुरातत्व विभाग की टीम। - फोटो : अमर उजाला
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इकदिल थाना क्षेत्र के ईश्वरीपुरा एवं आसपास के इलाके में पुरातत्व महत्व की ढेर सारी चीजें मिलने की संभावना है। यहां खुदाई कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण चीजें मिल सकती हैं। यह दावा किया है सोमवार को निरीक्षण करने पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम और जैन समाज की टीम ने। दोनों का दावा है कि जिस तरह से लगातार इस इलाके में मूर्तियां मिल रही है, इससे स्पष्ट है कि सात, आठ किलोमीटर की परिधि का क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है।
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करीब 20 मीटर तक नीचे खुदाई करवाई जाए तो तमाम चीजें मिल सकती है। आगरा से डा. भुवन विक्रम की अगुवाई में पहुंची टीम ने विभाग के आला अफसरों के साथ ही शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है। वहीं जैन समाज की टीम ने भी मूर्तियों को देखा। उन पर खुदी इबारत को पढ़ने का प्रयास किया साथ ही उनके फोटो भी लिए।  श्री भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल कुमार जैन सेठी के निर्देश पर पहुंचे तीर्थ संरक्षणीय महासभा दिल्ली के डा. शिशिर जैन एवं एके खन्ना ने इटावा जैन समाज के जितेंद्र जैन हैप्पी, अरविंद्र जैन पोददार, सनतकुमार जैन, चक्रेश जैन, अजीत जैन, मंगल जैन आदि के साथ करीब डेढ़ घंटे तक ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी ली।
 

दिल्ली से आए डा. शिशिर जैन ने बताया कि ईश्वरीपुरा व आसई बहुत ही प्राचीन गांव है। यमुना के किनारे टीले पर है। पूर्व की सभी संस्कृतियों के अवशेष मिले है। इसमें जैन धर्म की प्रधानता है। जो खंडित मूर्तियां मिली है। वह एक हजार वर्ष पुरानी है। उनमें लिखी इबारत नागरी लिपि में है। डा. जैन का दावा है कि गांव में मिली मूर्तियां जैन तीर्थंकरों, उनके यक्ष यक्षणियाें के साथ सहस्त्र कूट, द्वितीर्थी, त्रितीर्थी जैसी हैं। जमीन के अंदर दीवारें बनीं हुई दिखती है। निश्चित तौर पर यहां जैन तीर्थ रहा होगा।
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जहां जिन मदिंरों का समूह होगा। एक नहीं काफी संख्या में मंदिर होंगे। उन्होंने कहा कि जैन महासभा की ओर केंद्र सरकार से उक्त स्थल की पुरातात्विक खुदाई कराने की मांग कराई जाएगी। डा. शिविर जैन ने बताया कि मूर्तियों दिगंबर आचार्यों के संध, दानदातारों के नाम का उल्लेख नजर आता है। इसको अभिलेख शास्त्री के पास ले जाएंगे और उसका शोध कराएंगे। ये किस राज वंश की है, किसका शासन है इसकी जानकारी करने का प्रयास करेंगे।


इनके संरक्षण के लिए इटावा के नसियां जी क्षेत्र में व्यवस्था हो सकती है। इसके अलावा आसई में समाज के द्वारा निर्माण कराया जा रहा है। छत बनना बाकी है। खुले में रखी प्रतिमाओं को उसमें संरक्षित कराया जाएगा। मूर्तियों को संरक्षित करने में जैन महासभा पूरा सहयोग करेगी।
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